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बालाकोट में भारतीय वायुसेना के साहसी हवाई हमलों की इनसाइड स्टोरी

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के आतंकी ठिकाने पर जो साहसी हवाई हमले किए, उन हवाई हमलों की कुशल योजना के बारे में इंडिया टीवी ने शुक्रवार को ‘आज की बात’ कार्यक्रम में जानकारी दी

Written by: Rajat Sharma [Published on:16 Mar 2019, 4:12 PM IST]
Rajat Sharma Blog- India TV
Image Source : INDIA TV Rajat Sharma Blog

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के आतंकी ठिकाने पर जो साहसी हवाई हमले किए, उन हवाई हमलों की कुशल योजना के बारे में इंडिया टीवी ने शुक्रवार को ‘आज की बात’ कार्यक्रम में जानकारी दी। कार्रवाई वाली खुफिया जानकारी में परिसर के अंदर के कमरों का विवरण शामिल था जहां आतंकवादी, उनके प्रशिक्षक, हैंडलर और आईएसआई सेना के अधिकारी रह रहे थे। पहली बार, ये विवरण मीडिया को उन लोगों के लिए उपलब्ध कराया गया है जो अभी भी संदेह करते हैं कि हवाई हमले सफल हुए थे या नहीं।

एयर स्ट्राइक का सुझाव असल में भारतीय वायुसेना के एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ की तरफ से आया, बी एस धनोआ खुद भी एक फाइटर पायलट रह चुके हैं। 1999 में करगिल संघर्ष के दौरान हवाई हमलों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

आज के समय में हवाई हमले तभी किए जाते हैं जब विस्तृत लक्ष्य और योजना की जानकारी लड़ाकू पायलट को दी जाए। लेजर से नियंत्रित होने वाले स्मार्ट बमों को इस तरह से तैयार किया गया है कि वह सीधे लक्ष्य पर ही जाकर टकराएं। पूरे खाके को सैटेलाइट की निगरानी के साथ चिन्हित किया गया था।

पहाड़ी की चोटी और घने जंगल में स्थित जैश के ठिकाने में पहले से ही आतंकियों के बारे में जानकारी थी। खुफिया जानकारी से यह भी पता चला कि लगभग 300 आतंकवादी कैंप में जमा हुए हैं और जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर के अगले 2-3 दिनों में आने की उम्मीद थी। लेकिन हमारे वायु सेना प्रमुख ने इंतजार नहीं करने का फैसला किया, और हवाई हमले का फैसला लिया गया।

हमारे मिराज-2000 जेट विमानों के लिए जब हवाई हमले की योजना तैयार की गई थी, तो मुख्य चिंता यह थी कि पाकिस्तानी वायुसेना कैसे प्रतिक्रिया देगी। प्रधानमंत्री ने साफ निर्देश दिए थे कि हमारी तरफ से कोई हताहत नहीं होना चाहिए।

हमारे रणनीतिकारों को पता चला कि पाकिस्तान वायु सेना की कमान को हमारे लड़ाकू विमानों का मुकाबला करने के लिए अपने विमान भेजने में 13 मिनट लगेंगे। इस प्रकार, हमारे वायु सेना के पास दुश्मन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने, हमला करने और सुरक्षित वापस लौटने के लिए 13 मिनट का समय था। हवाई हमला सुबह 4:02 बजे हुआ और हमारे सभी विमान सुरक्षित लौट आए। जब तक पाकिस्तानी एफ-16 विमानों ने हवाई हमले का मुकाबला करने के लिए उड़ान भरी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इतना ही नहीं, हमारे मिराज-2000 विमानों को कवर सपोर्ट देने के लिए भारतीय वायुसेना के अन्य विमान तैयार थे। अगर पाकिस्तानी एयर फोर्स के एफ-16 विमान हमारे वायु क्षेत्र में आते, तो उन्हें मार गिराया जा सकता था। पाकिस्तानी वायु सेना ने स्वीकार किया है कि जब उनके विमानों को पता चला कि भारतीय विमानों का एक मजबूत स्क्वॉड्रन उनका इंतजार कर रहा है तो वे वापस चले गए।

पाकिस्तान की सेना को उम्मीद थी कि भारत की तरफ से लाइन ऑफ कंट्रोल या अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा पर सर्जिकल स्ट्राइक की जाएगी। यही वजह थी कि उन्होंने जैश के आतंकवादियों को नियंत्रण रेखा से 50 किलोमीटर पीछे हटा लिया था और बालाकोट में पाकिस्तानी क्षेत्र के अंदर रखा था।

पाकिस्तानी सेना को इस बात की भनक तक नहीं थी कि भारतीय वायुसेना बालाकोट कैंप पर हवाई हमला करेगी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे जिन्होंने एक सार्वजनिक रैली में खुलासा किया कि दुश्मन ने जमीन पर सर्जिकल स्ट्राइक की उम्मीद की थी, लेकिन हवाई हमले किए गए।

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