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कठुआ रेप-हत्या केस: गुनहगारों को सजा का ऐलान, तीन आरोपियों को उम्रकैद, तीन को पांच साल की सजा

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में पिछले साल जनवरी में आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में पठानकोट की एक विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को उम्रकैद और तीन आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: June 10, 2019 19:43 IST
Punishment for Kathua Rape and murder Accused.- India TV
Punishment for Kathua Rape and murder Accused.

पठानकोट: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची से सामूहिक बलात्कार और हत्या के सनसनीखेज मामले में तीन मुख्य आरोपियों को सोमवार को यहां की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई जबकि साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए तीन अन्य को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई। अदालत में पीड़िता के परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले मुबिन फारूकी के मुताबिक, करीब एक वर्ष तक मुकदमा चलने के बाद अदालत ने मामले में छह को दोषी करार दिया जबकि मुख्य षड्यंत्रकर्ता सांजी राम के बेटे विशाल जंगोतरा को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष के वकील संतोख सिंह ने कहा कि जिस देवस्थानम (मंदिर) में अपराध हुआ था वहां की देखभाल करने वाले सांजी राम, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और एक अन्य आरोपी परवेश कुमार को रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) के तहत आपराधिक साजिश, हत्या, अपहरण, सामूहिक बलात्कार, साक्ष्यों को नष्ट करने, पीड़िता को नशीला पदार्थ खिलाने और समान आशय के तहत अपराध को अंजाम देने का दोषी करार दिया गया। अभियोजन ने उन्हें फांसी की सजा देने की मांग की थी।

अभियोजन पक्ष के वकील ने बताया कि तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और आपराधिक षड्यंत्र एवं हत्या के लिए उन पर एक- एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। 

उन्होंने कहा कि आजीवन कारावास की सजा का मतलब है कि नैसर्गिक मृत्यु होने तक वे जेल में रहेंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें आरपीसी के तहत विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग जेल की सजा भी सुनाई गई जो आजीवन कारावास की सजा से साथ चलेगी।

उन्होंने बताया कि तीन सह अपराधियों -- पुलिस उपनिरीक्षक आनंद दत्ता, मुख्य आरक्षक (हेड कांस्टेबल) तिलक राज और विशेष पुलिस अधिकारी सुरेन्दर वर्मा को साक्ष्य नष्ट करने के लिए पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। उन्होंने कहा कि अगर वे जुर्माना नहीं भरते हैं तो उन्हें जेल में अतिरिक्त छह महीने कैद की सजा भुगतनी होगी। 

अभियोजन पक्ष के वकीलों की टीम में जे के चोपड़ा, एस एस बसरा, हरमिंदर सिंह और भूपिंदर सिंह शामिल थे। उन्होंने मुख्य आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की और विशाल को बरी किए जाने के खिलाफ वे अपील करेंगे। बयान में कहा गया है, ‘‘हत्या और सामूहिक बलात्कार के लिए दोषी ठहराए गए सभी तीनों आरोपियों के लिए हमने फांसी की सजा की मांग की। यह हम सभी की कड़ी मेहनत और जांच एवं कानूनी समझ का नतीजा है। हमें 99 फीसदी परिणाम हासिल हुआ है।’’ 

जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ने एक किशोर सहित आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। किशोर के खिलाफ अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई है क्योंकि उसकी उम्र तय करने की याचिका पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। पिछले वर्ष अप्रैल में दायर 15 पन्नों के आरोपपत्र के मुताबिक, लड़की का अपहरण पिछले वर्ष दस जनवरी को हुआ और गांव के एक छोटे मंदिर में उसे चार दिनों तक नशीला पदार्थ देकर उससे बलात्कार किया गया। मंदिर की देखरेख सांजी राम करता था। बाद में लड़की की हत्या कर दी गई।

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