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महाबलीपुरम से आतंक पर 'महाप्रहार', मोदी-जिनपिंग ने आतंकवाद का मिलकर सामना करने का लिया संकल्प

वुहान के बाद ये दूसरा मौका है जब दोनों नेता इतने करीब से एक दूसरे से मिल रहे हैं और एक दूसरे को इतना वक्त दे रहे हैं। पीएम मोदी पहले तो करीब दो घंटे तक राष्ट्रपति जिनपिंग को महाबली पुरम के मंदिरों को दिखाते रहे, फिर दोनों ने ढाई घंटे तक डिनर पर बात की।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: October 12, 2019 7:03 IST
महाबलीपुरम से आतंक पर 'महाप्रहार', मोदी-जिनपिंग ने आतंकवाद का मिलकर सामना करने का लिया संकल्प- India TV
Image Source : PTI महाबलीपुरम से आतंक पर 'महाप्रहार', मोदी-जिनपिंग ने आतंकवाद का मिलकर सामना करने का लिया संकल्प

मामल्लापुरम: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अनौपरिक समिट का आज दूसरा दिन है। आज भी दोनों नेताओं की बातचीत जारी रहेगी। शुक्रवार को दोनों नेताओं ने करीब पांच घंटे तक बातचीत की और डिनर के वक्त तो बातचीत ढाई घंटे से ज्यादा वक्त तक खिंच गई। इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद और कट्टरपंथ की चुनौतियों का मिलकर सामना करने का संकल्प लिया। दोनों ने माना कि आतंक और धार्मिक कट्टरता दोनों देशों के लिए साझा चुनौती है और इससे मिलकर निपटना होगा। 

पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच ये बातचीत भी हुई कि आतंकी दोनों देशों में सभी धर्मों की साझा विरासत के लिए खतरा बन रहा है और विविधता वाले समाज के तानेबाने को कमज़ोर कर रहा है। विदेश सचिव विजय गोखले ने देर शाम संवाददाता सम्मेलन में बताया कि दोनों नेताओं ने निवेश के नए क्षेत्रों को पहचानने, व्यापार बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापार की अहमियत पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापार एवं आर्थिक मामलों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार घाटे और व्यापार में असंतुलन पर भी बातचीत की। 

गोखले ने बताया कि मोदी और शी ने चार विश्व धरोहर स्थलों की सैर करने समेत करीब साढे चार घंटे साथ समय बिताया। इसके साथ ही मामल्लापुरम में दोनों नेताओं की दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता का पहला दिन समाप्त हो गया। गोखले ने बताया कि मोदी एवं शी ने आतंकवाद के कारण दोनों देशों के सामने पैदा हो रही चुनौतियों पर चर्चा की और इससे निपटने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। 

उन्होंने कहा, ‘‘इस बात को स्वीकार किया गया कि दोनों देश बहुत जटिल और बहुत विविध हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत एवं चीन बड़े देश हैं, दोनों के लिए कट्टरपंथ चिंता का विषय है।’’ उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मिलकर काम करने का संकल्प लिया ताकि कट्टरपंथ एवं आतंकवाद दोनों देशों के बहु-सांस्कृतिक, बहु-जातीय, बहु-धार्मिक समाजों को प्रभावित नहीं कर पाए। मोदी और शी ने अपनी-अपनी राष्ट्रीय दूरदृष्टि एवं शासन संबंधी प्राथमिकताओं पर विस्तृत वार्ता की। 

गोखले ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने कहा कि (प्रधानमंत्री पद पर) दूसरे कार्यकाल के लिए उन्हें चुने जाना आर्थिक विकास के लिए मिला जनादेश है। राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी को जनादेश मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि वह आगामी साढे चार साल में मोदी के साथ सभी मुद्दों पर करीब तौर पर काम करने के इच्छुक हैं।’’ 

उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने तमिलनाडु और चीन के पूर्वी तट के बीच प्राचीन ऐतिहासिक एवं व्यापारिक संबंधों पर भी बातचीत की। गोखले ने कहा, ‘‘150 मिनट से अधिक समय तक बातचीत चली और यह वार्ता तय समय से अधिक देर चली। काफी खुली और सौहार्दपूर्ण चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने एक साथ वक्त बिताया। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के शेष सदस्यों ने अन्य स्थान पर रात्रिभोज किया।’’

वुहान के बाद ये दूसरा मौका है जब दोनों नेता इतने करीब से एक दूसरे से मिल रहे हैं और एक दूसरे को इतना वक्त दे रहे हैं। पीएम मोदी पहले तो करीब दो घंटे तक राष्ट्रपति जिनपिंग को महाबली पुरम के मंदिरों को दिखाते रहे, फिर दोनों ने ढाई घंटे तक डिनर पर बात की। ये बातचीत आज भी जारी रहने वाली है। मुलाकात का ये कार्यक्रम आज सुबह से ही शुरू हो जाएगा।

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