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भारत में बनेगी दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे लाइन, होंगी 74 सुरंगें

इस लाइन पर 3,000 मीटर की ऊंचाई पर सुरंग के भीतर रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा। आधे से ज्यादा रास्ता सुरंगों में होगा और सबसे लंबी सुरंग 27 किलोमीटर की होगी।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: October 27, 2018 10:59 IST
भारत में बनेगी दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे लाइन, होंगी 74 सुरंगें- India TV
भारत में बनेगी दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे लाइन, होंगी 74 सुरंगें

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे भारत-चीन सीमा पर एक रेलवे लाइन बना रही है जो दुनिया की सबसे ऊंची रेल लाइन होगी। इसका ट्रैक ऐसे क्षेत्र से होकर गुज़रेगा जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 5,360 मीटर है। अभी चीन की चिंगहई-तिब्बत रेल लाइन दुनिया की सबसे ऊंची रेल लाइन है। इसकी समुद्र तल से अधिकतम ऊंचाई लगभग दो हजार मीटर है। हम बात कर रहे हैं बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन की जिसे भारतीय रेलवे ने केंद्र से राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने की सिफ़ारिश की है।

465 किलोमीटर लंबे ट्रैक के पहले चरण के फाइनल लोकेशन सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। परियोजना की लागत 83,360 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें करीब 74 सुरंगें बनेगी। एक सुरंग 27 किलोमीटर लंबी होगी। आधे से ज्यादा 244 किमी हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इसके अलावा 124 बड़े पुल और 396 छोटे पुल बनाए जाएंगे। इस लाइन पर 30 स्टेशन होंगे।

यह प्रदेश की सबसे लंबी पहली ब्रॉडगेज लाइन होगी। अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ने यह सुझाव भी दिया है कि हिमाचल प्रदेश के उप्शी और लेह के फे के बीच 51 किलोमीटर लंबी पट्टी पर तत्काल निर्माण शुरू होना चाहिए। रेलवे की यह सबसे कठिन परियोजना है और सामरिक महत्व के लिहाज से यह पांच सर्वाधिक महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है।

खास बात होगी कि इस लाइन पर 3,000 मीटर की ऊंचाई पर सुरंग के भीतर रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा। आधे से ज्यादा रास्ता सुरंगों में होगा और सबसे लंबी सुरंग 27 किलोमीटर की होगी। इस रूट के जरिए बिलासपुर और लेह के बीच महत्वपूर्ण जगहें जुड़ जाएंगी। इनमें सुंदरनगर, मंडी, मनाली, कीलॉन्ग, कोकसार, कारू, डार्चा और उपशी जैसे शहर शामिल हैं। काम पूरा होने के बाद दिल्ली से लेह की दूरी मात्र 20 घंटे की रह जाएगी। अभी इसी दूरी को तय करने में 40 घंटे का वक्त लगता है।

रेलवे का लक्ष्य है कि 2022 तक बिलासपुर-मनाली-लेह प्रॉजेक्ट को पूरा कर लिया जाए लेकिन इस पूरी रेल लाइन को बनाने के लिए रेलवे को अत्याधुनिक तकनीक की भी ज़रूरत है। इसके लिए अमरीका से उपग्रहों की तस्वीरों की ज़रूरत पड़ेगी और साथ ही पूरे ट्रैक के रास्ते के भूगोल को समझने के लिए लेज़र आधारित लिडार टेक्नॉलजी की भी ज़रूरत पड़ेगी।

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