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पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने के फैसले का भारत ने किया स्वागत

एफएटीएफ पैरिस स्थित अंतर-सरकारी संस्था है। इसका काम गैर-कानून आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाना है। इसका गठन 1989 में किया गया था। एफएटीएफ की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: June 30, 2018 12:41 IST
पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने के फैसले का भारत ने किया स्वागत- India TV
पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने के फैसले का भारत ने किया स्वागत

नयी दिल्ली: आतंकवादी समूहों के वित्तपोषण को रोकने में नाकाम पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के एफएटीएफ के फैसले का भारत ने स्वागत किया है। साथ ही भारत ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान से पनपने वाले आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जताई जा रही चिंता के समाधान के लिए अब वह कुछ विश्वसनीय कदम उठाएगा। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने दो दिन पहले पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया था। वैश्विक प्रहरी संस्था द्वारा सुझाई गई कार्य योजना को लेकर भारत ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान समयबद्ध तरीके से इसका पालन करेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि एफएटीएफ की कार्य योजना का पाकिस्तान समयबद्ध तरीके से पालन करेगा और उसके नियंत्रण में आने वाले क्षेत्रों से पनपने वाले आतंकवाद संबंधित अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को सुलझाने के लिए विश्वसनीय कदम उठाएगा।”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हाफिज सईद जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी और जमात-उद-दावा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन पाकिस्तान में अभी भी सक्रिय हैं। ऐसे में पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि कहा कि हमें उम्मीद है कि एफएटीएफ ऐक्शन प्लान का समयबद्ध तरीके से पालन किया जाएगा।

पाकिस्तान द्वारा अपनी सीमाओं में आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने के खिलाफ भारत लगातार वैश्विक कार्रवाई किए जाने की मांग करता रहा है और 2008 के मुंबई हमले समेत भारत में हुए कई हमलों के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान के आतंकवादी समूहों को सजा देने पर जोर देता रहा है।

बता दें कि एफएटीएफ पैरिस स्थित अंतर-सरकारी संस्था है। इसका काम गैर-कानून आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाना है। इसका गठन 1989 में किया गया था। एफएटीएफ की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है। ग्रे लिस्ट में जाने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश पर भी विपरीत असर पड़ता है।

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