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  5. भारत-पाक 2003 के संघर्ष विराम समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर सहमत, DGMO ने हॉटलाइन पर की बातचीत

बॉर्डर पर तनाव कम करने के लिए बड़ी पहल, भारत-पाकिस्तान सरहद पर गोलीबारी रोकने पर सहमत

भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सरहद पर जारी तनाव कम करने की बड़ी पहल हुई है...

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: May 29, 2018 20:57 IST
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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में सीमा पर गोलीबारी रोकने के लिए भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियानों के महानिदेशक (DGMO) 2003 के संघर्ष विराम समझौते को ‘‘पूरी तरह से लागू करने’’ पर आज सहमत हुए। थल सेना ने कहा है कि दोनों सैन्य कमांडरों ने शाम छह बजे ‘हॉटलाइन’ पर बातचीत के दौरान जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। विशेष हॉटलाइन संपर्क की पहल पाकिस्तानी डीजीएमओ ने की।

भारत के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान और पाकिस्तान के मेजर जनरल साहिर शमशाद मिर्जा के बीच बातचीत के बाद दोनों सेनाओं ने समान बयान जारी कर कहा कि दोनों देश 15 साल पुराने संघर्ष विराम समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर सहमत हुए हैं। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोनों ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन ना हो।

गौरतलब है कि एलओसी पर पिछले कुछ महीनों में संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है।

रक्षा सूत्रों ने नई दिल्ली में बताया कि पाकिस्तानी थल सेना द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन किए जाने की इस साल अब तक कुल 908 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 860 था। वहीं, इस्लामाबाद से प्राप्त खबर के मुताबिक पाकिस्तान थल सेना की मीडिया शाखा इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा है कि दोनों शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच आज एक विशेष हॉटलाइन संपर्क स्थापित किया गया।

बयान में कहा गया है कि दोनों डीजीएमओ ने नियंत्रण रेखा और ‘वर्किंग बाउंड्री’ पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। शांति सुनिश्चित करने के लिए और सीमा पर बाशिंदों को पेश आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए वे मौजूदा स्थिति को बेहतर करने के लिए गंभीर कदम उठाने को लेकर भी सहमत हुए।

वे 2003 के संघर्षविराम समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर सहमत हुए। उन्होंने संयम बरतने और मौजूदा तंत्र के जरिए मुद्दे का हल करने का भी फैसला किया। बयान में कहा गया है कि दोनों डीजीएमओ इस बात पर भी सहमत हुए कि कोई मुद्दा उठने पर संयम रखा जाएगा और उस विषय का हॉटलाइन संपर्क तथा स्थानीय कमांडरों की फ्लैग मीटिंग के मौजूदा तंत्र के जरिए हल किया जाएगा।

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