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भारत के लिए एससीओ की सदस्यता मिलने के क्या हैं मायने?

भारत के लिए इसकी अहमियत इसलिए भी है कि उसके दो अहम प्रतिद्वंदी देश चीन और पाकिस्तान भी इसमें होंगे। ऐसे में भारत को कूटनीतिक स्तर पर काफी सर्तक रहना होगा।

India TV News Desk India TV News Desk
Published on: June 09, 2017 10:48 IST
Modi-SCO- India TV
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नई दिल्ली: भारत आज चीन की अगुवाई वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल हो जाएगा। लेकिन इस संगठन में भारत अपनी शर्तों के साथ ही बना रहेगा। पाकिस्तान को भी भारत के साथ इस संगठन के पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल किया जाएगा। भारत को एससीओ में शामिल होने पर सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसके अधिकांश सदस्य देशों के पास ऊर्जा के बड़े भंडार हैं और बेहतर रिश्ते होने की वजह से भारत को इनमें हिस्सा मिल सकता है। लेकिन भारत के लिए इसकी अहमियत इसलिए भी है कि उसके दो अहम प्रतिद्वंदी देश चीन और पाकिस्तान भी इसमें होंगे। ऐसे में भारत को कूटनीतिक स्तर पर काफी सर्तक रहना होगा। ये भी पढ़ें: कैसे होता है भारत में राष्ट्रपति चुनाव, किसका है पलड़ा भारी, पढ़िए...

इससे भारत को और क्या-क्या फायदे हो सकते हैं.....

- भारत को इससे मध्य एशिया की चुनौतियों और समस्याओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिलेगा और वह अपने आप को एक क्षेत्रीय ताकत के तौर पर पेश कर पाएगा।

- किसी न किसी मसले पर चीन लगातार पाकिस्तान की तरफदारी करता रहा है लेकिन अब जब भारत और पाकिस्तान इसके सदस्य हो गए हैं तब चीन के लिए सदस्य देशों की भावनाओं को नजरअंदाज कर पाकिस्तान का हिमायती बनना आसान नहीं रहेगा।

- NSG और अज़हर मसूद के मामले में चीन हमेशा से दखल देते रहा है, ऐसे में इस संगठन में रहकर उस पर अंकुश लगा सकता है।

- भारत के खिलाफ पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है लेकिन इस संगठन में शामिल होने के बावजूद अगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है, तो भारत के पास उसपर दबाव बनाने का बड़ा मौका हाथ लगेगा।

- पाकिस्तान की करतूतों को भारत सबूतों के आधार पर उजागर कर सकता है।

- भारत-पाकिस्तान के शामिल होने के बाद इस संगठन की स्थिति और भी मजबूत हो गई है, ऐसे में इतनी बड़ी शक्ति को अनसुना करना पाकिस्तान पर बहुत भारी पड़ सकता है।

- भारत को पाकिस्तान को घेरने का एक बहुत बड़ा मंच मिल जाएगा।

- ऐसा माना जा रहा है कि आतंकवाद के मसले पर रूस के लिए भारत का सहयोग करना और भी आसान हो जायेगा।

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आखिर भारत में इसे क्यों कहा जाता है ‘उड़ता ताबूत’?

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