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'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण कर बोले पीएम मोदी, सरदार पटेल नहीं होते तो चार मीनार देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता

इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार साहब ने संकल्प न लिया होता, तो आज गीर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ में पूजा करने के लिए और हैदराबाद के चार मीनार को देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: October 31, 2018 23:49 IST
Statue of Unity- India TV
Statue of Unity

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर बुधवार को 182 मीटर ऊंची 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण किया। नर्मदा नदी में साधु बेट द्वीप पर निर्मित यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इस प्रतिमा के निर्माण में 2,389 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और यह पटेल को समर्पित है, जिन्होंने 1947 में बंटवारे के बाद रजवाड़ों में बंटे देश को जोड़ने में अहम भूमिका अदा की थी।

इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार साहब ने संकल्प न लिया होता, तो आज गीर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ में पूजा करने के लिए और हैदराबाद के चार मीनार को देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता और यदि उनका संकल्प न होता, तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सीधी ट्रेन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

उन्होंने कहा कि कच्छ से कोहिमा तक, करगिल से कन्याकुमारी तक आज अगर बेरोकटोक हम जा पा रहे हैं तो ये सरदार साहब की वजह से, उनके संकल्प से ही संभव हो पाया है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस कमज़ोरी पर दुनिया हमें उस समय ताने दे रही थी, उसी को ताकत बनाते हुए सरदार पटेल ने देश को रास्ता दिखाया। उसी रास्ते पर चलते हुए संशय में घिरा वो भारत आज दुनिया से अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है, दुनिया की बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की तरफ आगे बढ़ रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि सरदार पटेल ने 5 जुलाई, 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए कहा था, “विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, वैर का भाव, हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और न ही दोबारा किसी का गुलाम होना है।” उन्होंने कहा कि सरदार साहब के इसी संवाद से, एकीकरण की शक्ति को समझते हुए उन्होंने अपने राज्यों का विलय कर दिया। देखते ही देखते, भारत एक हो गया। सरदार साहब के आह्वान पर देश के सैकड़ों रजवाड़ों ने त्याग की मिसाल कायम की थी। हमें इस त्याग को भी कभी नहीं भूलना चाहिए।

सरदार पटेल नहीं होते तो चार मीनार देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता: पीएम मोदी

सरदार पटेल नहीं होते तो चार मीनार देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता: पीएम मोदी

यह प्रतिमा चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा की प्रतिमा (153 मीटर) से लगभग 29 मीटर ऊंची और न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (93 मीटर) से लगभग दोगुनी है। मोदी द्वारा पटेल की इस विशाल प्रतिमा के अनावरण के बाद इसके ऊपर से भारतीय वायुसेना के तीन विमानों ने उड़ान भरी और आकाश में तिरंगा बनाया। 

गुजरात सरकार को उम्मीद है कि यह प्रतिमा पर्यटन को बढ़ावा देगी और रोजाना 15,000 पर्यटक इसे देखने आएंगे। सरदार पटेल की इस प्रतिमा के अलावा मोदी ने 'वैली ऑफ फ्लावर्स' और 'टेंट सिटी' का भी उद्घाटन किया।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की 10 मुख्य बातें

  • प्रतिमा की कुल ऊंचाई 182 मीटर है। प्रतिमा में लगे पैर की ऊंचाई 80 फीट है जबकि हाथ की 70 फीट, कंधा 140 फीट और चेहरे की ऊंचाई 70 फीट है।
  • अगर आपकी लंबाई 5.6 फीट है तो यह प्रतिमा आपसे 100 गुना बड़ी होगी
  • प्रतिमा का निर्माण लार्सन एंड टूब्रो नाम की कंपनी ने किया है और इसको बनाने की लागत 2,389 करोड़ रुपए आई है
  • इस प्रतिमा को इतना मजबूत बनाया गया है कि यह 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आ रही आंधी को झेल सकती है, अगर भूकंप आया तो यह रिएक्टर स्केल 6.5 तीव्रता का झटका सह सकती है​
  • सरदार पटेल की इस प्रतिमा का डिजाइन नोएडा के मूर्तिकार राम वी सूतर ने तैयार किया है, इसके लिए उन्होंने सरदार पटेल की लगभग 2000 पुरानी तस्वीरों का अध्ययन किया। प्रतिमा को दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि सरदार पटेल धीरे-धीरे सरदार सरोवर बांध की तरफ बढ़ रहे हों।
  • प्रतिमा के अंदर एक एलिवेटर लगा हुआ है जो सैलानियों को प्रतिमा के मध्य तक लेकर जा सकता है, एक बार में एलिवेटर के जरिए 200 यात्रियों को लेकर जाया जा सकता है।
  • इस प्रतिमा तक सैलानियों को पहुंचान के लिए गुजरात सरकार केवादिया शहर से प्रतिमा तक 3.5 किलोमीटर लंबा हाईवे भी तैयार कर रही है।
  • प्रतिमा को तैयार करने के लिए देश के लाखों गांवों से लगभग 135 टन लोहा इकट्ठा किया गया था।
  • सेल्फी के दीवानों के लिए इस प्रतिमा के नजदीक सरकार ने कुछ सेल्फी प्वाइंट भी तैयार किए हैं
  • इस प्रतिमा को तैयार करने में सिर्फ 33 महीने का समय लगा है जबकि, चीन में बनी 153 मीटर ऊंची भगवाल बुद्ध की प्रतिमा को बनाने में 11 वर्ष लगे थे।

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