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The Last Indian Village: जानिये कुछ खास बातें..

India TV Photo Desk [Updated: 01 Jun 2016, 6:31 PM IST]
  • भारत का आखिरी गांव माणा, बद्रीनाथ से 3 किमी ऊंचाई पर बसा हुआ है। माणा समुद्र तल से 19,000 फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यह गांव भारत और तिब्बत की सीमा से लगा हुआ है। माणा गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ कई अन्य कारणों की वजह से भी मशहूर है। इस गांव में रडंपा जाति के लोग रहते हैं। इस गांव के बारे में पहले लोग बहुत कम जानते थे लेकिन पक्की सड़कें बनने के बाद हर कोई इसके बारे बारे में जानता है। आइए जानते हैं माणा गांव के बारे में।
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    भारत का आखिरी गांव माणा, बद्रीनाथ से 3 किमी ऊंचाई पर बसा हुआ है। माणा समुद्र तल से 19,000 फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यह गांव भारत और तिब्बत की सीमा से लगा हुआ है। माणा गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ कई अन्य कारणों की वजह से भी मशहूर है। इस गांव में रडंपा जाति के लोग रहते हैं। इस गांव के बारे में पहले लोग बहुत कम जानते थे लेकिन पक्की सड़कें बनने के बाद हर कोई इसके बारे बारे में जानता है। आइए जानते हैं माणा गांव के बारे में।

  • वसुधारा वॉटर फॉल: भीमपुल से 5 किमी की दूरी पर वसुधारा वॉटर फॉल है। इस वॉटर फॉल में पानी 400 फीट ऊंचाई से गिरता हुआ एकदम मोतियों की बौछारों की तरह लगता है। इस वॉटप फॉल को लेकर मान्यता है कि इस झरने का पानी पापियों को नहीं भिगाता है।
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    वसुधारा वॉटर फॉल: भीमपुल से 5 किमी की दूरी पर वसुधारा वॉटर फॉल है। इस वॉटर फॉल में पानी 400 फीट ऊंचाई से गिरता हुआ एकदम मोतियों की बौछारों की तरह लगता है। इस वॉटप फॉल को लेकर मान्यता है कि इस झरने का पानी पापियों को नहीं भिगाता है।

  • घर में बनाई जाती है शराब: इस गांव की आबादी बहुत ही कम है यहां पर केवल 60 ही घर है। यहां पर बने घर लकड़ी के बने हुए हैं। यहां रहने वालों लोग स्वंय ऊपरी मंजिल पर रहते हैं और जानवरों को नीचे रखा जाता है। इस गांव में चावल से शराब बनाई जाती है। शराब यहां के हर घर में बनाई जाती है।
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    घर में बनाई जाती है शराब: इस गांव की आबादी बहुत ही कम है यहां पर केवल 60 ही घर है। यहां पर बने घर लकड़ी के बने हुए हैं। यहां रहने वालों लोग स्वंय ऊपरी मंजिल पर रहते हैं और जानवरों को नीचे रखा जाता है। इस गांव में चावल से शराब बनाई जाती है। शराब यहां के हर घर में बनाई जाती है।

  • भोजपत्र की अधिक संख्या: इस गांव में आलू की खेती की जाती है। इस गांव में भोजपत्र बढ़ी संख्या में मिलते हैं। आपको याद होगा कि इन्हीं भोजपत्र पर गुरुओं ने ग्रंथों की रचना की थी।
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    भोजपत्र की अधिक संख्या: इस गांव में आलू की खेती की जाती है। इस गांव में भोजपत्र बढ़ी संख्या में मिलते हैं। आपको याद होगा कि इन्हीं भोजपत्र पर गुरुओं ने ग्रंथों की रचना की थी।

  • 1. माणा गांव में अगर आप जाएंगे तो यहां देखने के लिए गणेश गुफा और व्यास गुफा है। गणेश गुफा, व्यास गुफा की तुलना में छोटी है। गुफा के अंदर जाते ही आपको वहां एक छोटी सी शिला दिखाई देगी। इस शिला में वेदों का अर्थ लिखा हुआ है।
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    1. माणा गांव में अगर आप जाएंगे तो यहां देखने के लिए गणेश गुफा और व्यास गुफा है। गणेश गुफा, व्यास गुफा की तुलना में छोटी है। गुफा के अंदर जाते ही आपको वहां एक छोटी सी शिला दिखाई देगी। इस शिला में वेदों का अर्थ लिखा हुआ है।

  • जड़ी-बूटियों के लिए प्रसिद्ध: माणा गांव यहां मिलने वाली जड़ी-बूटियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां मिलने वाली सभी जड़ी-बूटी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। यहां की जड़ी-बूटी खाने से पथरी की बीमारी से निजात मिलता है।
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    जड़ी-बूटियों के लिए प्रसिद्ध: माणा गांव यहां मिलने वाली जड़ी-बूटियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां मिलने वाली सभी जड़ी-बूटी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। यहां की जड़ी-बूटी खाने से पथरी की बीमारी से निजात मिलता है।

  • भीमपुल: कहा जाता है कि पांडव इसी भीमपुल से होते हुए अलकापुरी गए थे। आज भी लोग इसे स्वर्ग का मार्ग मानकर इस रास्ते से चले जाते हैं। इस पुल के बारे में यह भी कहा जाता है कि जब पांडव इस से गुजरे थे तो वहां दो पहाड़ियों के बीच में खाई थी। जिसे पार करना बहुत ही मुश्किल था। उस समय पर भीम ने एक चट्टान को उठाकर फेंकी था जो कि पुल के रूप में बदल गया था।
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    भीमपुल: कहा जाता है कि पांडव इसी भीमपुल से होते हुए अलकापुरी गए थे। आज भी लोग इसे स्वर्ग का मार्ग मानकर इस रास्ते से चले जाते हैं। इस पुल के बारे में यह भी कहा जाता है कि जब पांडव इस से गुजरे थे तो वहां दो पहाड़ियों के बीच में खाई थी। जिसे पार करना बहुत ही मुश्किल था। उस समय पर भीम ने एक चट्टान को उठाकर फेंकी था जो कि पुल के रूप में बदल गया था।

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