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Khandaani Shafakhana Movie Review: टॉपिक है शानदार मगर कहानी और सोनाक्षी सिन्हा की एक्टिंग में नहीं दिखा दम

Khandaani Shafakhana Movie Review: एक कॉमेंडी जोनर की फिल्म है। जिसमें सोनाक्षी सेक्स से संबधित मुद्दे पर खुलकर बात कर रही हैं।

Diksha Chhabra Diksha Chhabra
Updated on: August 02, 2019 10:30 IST
Khandaani Shafakhana Movie Review

Khandaani Shafakhana Movie Review

  • फिल्म रिव्यू: खानदानी शफाखाना
  • स्टार रेटिंग: 2 / 5
  • पर्दे पर: August 2, 2019
  • डायरेक्टर: शिल्पी दासगुप्ता
  • शैली: ड्रामा/कॉमेडी

आजकल बॉलीवुड में उन मुद्दों पर फिल्में बन रहीं हैं जिन पर लोग बात करने से भी कतराते हैं। लोग सेक्स से जुड़े मुद्दों पर बात करने से बचते हैं। मगर अब फिल्मों के जरिए इस टैबू को हटाया जा रहा है। पहले विक्की डोनर फिर शुभ मंगल सावधान और अब इस विषय पर सोनाक्षी सिन्हा(Sonakshi Sinha) की फिल्म खानदानी शफाखाना(Khandaani Shafakhana ) बनी है। खानदानी शफाखाना में सेक्स क्लीनिक के बारे में खुलकर बात की गई है। कॉमेडी के साथ इस मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचा गया है। इस फिल्म से एक्टिंग की दुनिया में रैपर बादशाह(Badshah) ने कदम रखा है। फिल्म में वरुण शर्मा और अनु कपूर भी अहम भूमिका निभाते नजर आए हैं। फिल्म को शिल्पी दासगुप्ता(Shilpi Dasgupta) ने डायरेक्ट किया है।

कहानी

कहानी की शुरूआत होती है कुलभूषण खरबंदा यानि हकीम ताराचंद्र से, जो अपनी यूनानी दवाईयों की मदद से लोगों की सेक्स समस्याओं या यूं कहिए गुप्त रोगों का इलाज करते हैं। मामा जी के नाम से विख्यात हकीम ताराचंद्र का निधन हो जाता है और मरते मरते वो अपना खानदानी शफाखाना अपनी बहन की बेटी बेबी बेदी (सोनाक्षी सिन्हा) के नाम करके जाते हैं। बेबी बेदी पिता के निधन के बाद से ही अपने पूरे घर का खर्चा उठाती हैं। उनका एक निकम्मा भाई वरुण शर्मा(Varun Sharma) है। कर्जे को उतारने और पैसे के लिए मां की इजाजत के खिलाफ जाकर बेबी 6 महीने के लिए खानदानी शफाखाना चलाने लगती है। जहां वह मामा जी के मरीजों को दवाईयां देती हैं। इसी बीच होती है रैपर बादशाह की एंट्री जो यौन रोग से ग्रसित है और हकीम ताराचंद्र का पुराना मरीज है। उसके बाद से बेबी इस विषय पर लोगों से खुलकर बात करने को कहती है मगर लोग उसके केरेक्टर पर उंगली उठाते हैं। बेबी को इस बीच जेल भी जाना पड़ता है। अब फिल्म की पूरी कहानी तो हम बता नहीं सकते हैं उसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

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एक्टिंग
कहानी पंजाब के होशियारपुर की है। सोनाक्षी ने अपने लुक से तो खुद को पंजाबी दिखाया है मगर पंजाबी बोली पर पकड़ नहीं बना पाईं। सोनाक्षी की बेहतर एक्टिंग फिल्म में जान डाल सकती थी। उनका इस विषय पर बात करने को लेकर बोल्ड अंदाज निराला था मगर वह अपनी एक्टिंग से कन्विंस नहीं कर पा रही थीं। फिल्म में जितने भी पंच थे वो वरुण शर्मा की वजह से थे। हर बार की तरह इस बार भी वह हंसाने में सफल हो गए। इस फिल्म से एक्टिंग में कदम रखने वाले बादशाह अपने किरदार से हालांकि ज्यादा इंप्रेस नहीं कर पाए। वह फिल्म में ज्यादा नजर नहीं आए मगर जितनी बार भी आए कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए। अनु कपूर पूरे पंजाब के वकील के लुक में थे। उनकी भाषा, बात करने का अंदाज काफी अच्छा था। फिल्म में टीवी एक्टर प्रियांश जोरा भी नजर आए हैं। प्रियांश का शांत रहना और सोनाक्षी को अपनी बातों से समझाना सब काफी स्मूद था।

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डायरेक्शन
छोटे शहर और लोकेलिटी को काफी अच्छे तरीके से दिखाया गया है। आपको छोटी गलियों लोगों से पूरे पंजाब का एक शहर महसूस होता है। कोर्टरुम का सीक्वेंस काफी अच्छे से दिखाया गया है।

म्यूजिक
फिल्म में इमोशन्स के हिसाब से बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है। सोनाक्षी को मोटिवेट करने के लिए एक गाना भी शामिल किया गया है। फिल्म के आखिरी में बादशाह, सोनाक्षी और वरुण कोका गाने पर थिरकते नजर आएंगे।

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वीक प्वाइंट
फिल्म का टॉपिक अच्छा होने के बावजूद यह आपको कन्विंस करने में नाकमयाब होती है। ढाई घंटे की यह फिल्म काफी लंबी लगती है। फिल्म में कॉमेडी के नाम पर सिर्फ वरुण शर्मा ही आपको हंसा पाते हैं। सेकेंड हॉफ काफी लंबा लगने लगता है।

इंडिया टीवी इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार देता है।

खानदानी शफाखाना के फिल्म का रिव्यू अगर इंग्लिश में पढ़ना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें- Khandaani Shafakhana Movie Review