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यहां की एकमात्र सीट बचाने के लिए कड़ी चुनौती का सामना कर रही है भाजपा

भाजपा की उम्मीदें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्मे पर टिकी है और पार्टी के नेताओं का कहना है कि वे जीत के प्रति आश्वस्त हैं।

Bhasha Bhasha
Published on: March 29, 2019 14:13 IST
यहां की एकमात्र सीट बचाने के लिए कड़ी चुनौती का सामना कर रही है भाजपा - India TV
यहां की एकमात्र सीट बचाने के लिए कड़ी चुनौती का सामना कर रही है भाजपा 

सिकंदराबाद: तेलंगाना में हुये हाल के विधानसभा चुनाव में एक निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भाजपा को अपनी एकमात्र लोकसभा सीट बचाने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, भाजपा की उम्मीदें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्मे पर टिकी है और पार्टी के नेताओं का कहना है कि वे जीत के प्रति आश्वस्त हैं। सिकंदराबाद लोकसभा संसदीय सीट पर भाजपा को 2014 में 33.62 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार यह सीट सभी तीनों मुख्य पार्टियों भाजपा, कांग्रेस और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के लिए प्रमुख चुनावी रण बन गयी है।

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एक-एक वोट सुनिश्चित करने का प्रयास करते हुये प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों इस उम्मीद के साथ राज्य में पार्टी की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए शुक्रवार से रैलियां आयोजित करेंगे कि दक्षिण भारत में यह सीट पार्टी के लिए प्रवेश द्वार होगी। भाजपा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और यहां से वर्तमान सांसद बंगारू दत्तात्रेय के स्थान पर जी किशन रेड्डी को मैदान में उतारा है। किशन रेड्डी भाजपा राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष और तीन बार के विधायक हैं। वे हर कीमत पर सीट जीतने का प्रयास कर रहे हैं। 

दत्तात्रेय इस सीट से 1991 से चुनाव लड़ रहे थे। हालांकि उन्हें 2004 और 2009 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने 2014 में कांग्रेस के अपने प्रतिद्वंद्वी को 2,54,735 मतों से शिकस्त दी थी। उन्हें केन्द्र में श्रम और रोजगार राज्यमंत्री बनाया गया था लेकिन सितंबर 2017 में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था।

किशन रेड्डी इस सीट के लिए बाहरी माने जाते हैं। उन्हें 2018 में अम्बरपेट विधानसभा सीट से टीआरएस के प्रत्याशी से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।  भाजपा की एकमात्र सीट जीतने को लेकर दबाव की बात स्वीकार करते हुये रेड्डी को विश्वास है कि पार्टी चुनाव जीतेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं तीन बार से विधायक हूं। मैं यह चुनौती लेने के लिए तैयार हूं। लोग 2018 के विधानसभा से इतर इस चुनाव को देख रहे हैं। यह चुनाव मुख्यमंत्री चुनने के लिए नहीं है बल्कि देश का प्रधानमंत्री चुनने के लिए है। अगर टीआरएस जीतती है तो इससे लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि प्रधानमंत्री क्षेत्रीय पार्टी का नहीं बनेगा।’’ उन्होंने कहा कि मोदी की रैली से मतदाताओं का विश्वास बढ़ेगा और पार्टी की जीत की संभावना बढ़ेगी।

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