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बांग्लादेश: म्यांमार से भागे रोहिंग्या मुसलमानों के सामने है अब यह नई मुसीबत

कॉक्स बाजार जिले में घर-बार विहीन लाखों मुस्लिम रोहिंग्या ने शरण ले रखी है लेकिन हाल के दिनों में आने वाले शरणार्थियों ने बांस-बल्लियों और प्लास्टिक के सहारे पहाड़़ी के पास अपना तंबू गाड़ा है और सबसे ज्यादा तकलीफ उन्हें ही है...

Representational Image | AP Photo- India TV Hindi Representational Image | AP Photo

कॉक्स बाजार: विश्व के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर कॉक्स बाजार में शरण लिए रोहिंग्या मुसलमान मॉनसून के दिनों में बाढ़ और भूस्खलन की चिंता में डूबे हुए हैं। असुरक्षित और फिसलनदार पहाड़़ी के पास पनाह लिए शरणार्थियों को सबसे ज्यादा बारिश के दौरान भूस्खलन और बाढ़ का डर सता रहा है। पहाड़ी के पास रह रहे ओसिउर रहमान ने कहा, ‘हमारे परिवारों की मौत हो जाएगी। यहां हर जगह बच्चे हैं। हम डरे हुए हैं कि बारिश से भूस्खलन ना होने लगे।’ रहमान यहां पर बांस-बल्लियों के सहारे बनी झोपड़ी में अपने परिवार के 9 सदस्यों के साथ रहते हैं।

पिछले 9 महीने से बांग्लादेश के दक्षिणी पूर्वी हिस्से में आकर रह रहे 7 लाख रोहिंग्या मुसलमानों के लिए निकट आ रहा मॉनसून का महीना आफत की तरह होगा। भीषण खूनखराबे के बाद म्यांमार से आए इन शरणार्थियों का दर्द इस वक्त और बढ़ जाएगा। कॉक्स बाजार जिले में घर-बार विहीन लाखों मुस्लिम रोहिंग्या ने शरण ले रखी है लेकिन हाल के दिनों में आने वाले शरणार्थियों ने बांस-बल्लियों और प्लास्टिक के सहारे पहाड़़ी के पास अपना तंबू गाड़ा है और सबसे ज्यादा तकलीफ उन्हें ही है।

सुरक्षित स्थान की यहां पर भीषण कमी है। इस वजह से 2 लाख शरणार्थियों को बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के बीच ऐसे खतरनाक स्थानों पर पनाह लेनी पड़ी है। इनमें से महज 21,000 रोहिंग्या ही दूसरे स्थानों पर जा पाए हैं। कॉक्स बाजार में UNHCR शरणार्थी एजेंसी के प्रमुख केविन जे एलेन ने कहा, ‘वाकई जान का नुकसान हो सकता है क्योंकि पहाड़ियों और घाटी में पानी भरने से लोगों को खतरा होगा।’ कॉक्स बाजार में चक्रवात का भी खतरा बना रहता है और पूर्व में यहां पर इससे भीषण तबाही भी हो चुकी है।

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