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शी जिनपिंग ने इमरान खान के साथ मुलाकात में भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुधार के प्रति समर्थन जताया

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ शुक्रवार को यहां हुई मुलाकात के दौरान पाकिस्तान और भारत के तनावपूर्ण संबंधों में सुधार के प्रति अपने समर्थन की पेशकश की।

IndiaTV Hindi Desk
IndiaTV Hindi Desk 14 Jun 2019, 20:09:32 IST

बिश्केक: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ शुक्रवार को यहां हुई मुलाकात के दौरान पाकिस्तान और भारत के तनावपूर्ण संबंधों में सुधार के प्रति अपने समर्थन की पेशकश की। चीन की सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। शी की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बृहस्पतिवार को हुई उनकी मुलाकात के एक दिन बाद आई है जिसमें मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि पाकिस्तान के आतंकवाद की राह नहीं छोड़ने तक उसके साथ बातचीत संभव नहीं है।

शिन्हुआ संवाद समिति की खबर के मुताबिक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर खान से मुलाकात के दौरान शी ने कहा कि चीन, “पाकिस्तान और भारत के रिश्तों में सुधार का समर्थन करता है।” प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी के साथ बातचीत के दौरान पाकिस्तान में पनप रहे सीमा पार के आतंकवाद के मुद्दे को उठाया था और कहा कि भारत चाहता है कि संवाद शुरू करने के लिए “आतंक से मुक्त” माहौल बनाने की दिशा में पाकिस्तान की तरफ से “ठोस कदम” उठाए जाएं।

मोदी ने एससीओ शिखर वार्ता से इतर खान से मुलाकात नहीं कर बिश्केक में द्विपक्षीय बैठक के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सुझाव पर पानी फेर दिया। जनवरी 2016 में पठानकोट में वायुसेना के अड्डे पर पाकिस्तान के एक आतंकवादी संगठन के हमले के बाद से भारत पाकिस्तान से बातचीत नहीं कर रहा है और अपने इस रुख पर कायम है कि बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। पुलवामा हमले के बाद दोनों देश के बीच तनाव और बढ़ गया था जिसके बाद चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म करने के प्रयास किए थे।

शी ने कहा कि चीन पाकिस्तान की उसकी क्षमताओं के भीतर मदद करने का इच्छुक है। साथ ही उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान की राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी योजना को लागू करने में उसका समर्थन करता है और वह उसकी आतंकवाद रोधी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए देश की मदद को तैयार है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान एवं चीन को अपनी चिरकालिक साझेदारी को बरकरार रखने एवं विकसित करने के लिए साझी चिंताओं पर विस्तार से बातचीत करनी चाहिए ताकि क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त प्रयास मुमकिन हों।

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