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Hindi News उत्तराखंड देहरादून उत्‍तराखंड: हर-हर महादेव के जयघोष के बीच खुले केदारनाथ के कपाट, सैकड़ों किलो फूलों से हुआ श्रृंगार

उत्‍तराखंड: हर-हर महादेव के जयघोष के बीच खुले केदारनाथ के कपाट, सैकड़ों किलो फूलों से हुआ श्रृंगार

करीब 6 महीने बर्फ से ढके रहने के बाद केदारनाथ मंदिर के कपाट खुल गए हैं। गुरुवार को सुबह 5.33 बजे पूरे विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ भगवान केदारनाथ के द्वार देश विदेश के श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए।

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उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के धाम केदारनाथ मंदिर के कपाट छह माह के शीतकालीन अवकाश के बाद बृहस्पतिवार को तड़के श्रद्धालुओं के लिए फिर खोल दिये गये । अब अगले छह माह तक देश—विदेश के तीर्थयात्री उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में करीब 12 हजार फुट की ऊंचाई पर मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा केदारनाथ के दर्शन कर सकेंगे । 

श्री बदरीनाथ—केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी वीडी सिंह ने बताया कि केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रावल भीमाशंकर लिंग ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा अर्चना के बाद तड़के पांच बज कर करीब 35 मिनट पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिये खोल दिये । सिंह ने बताया कि कपाट खोले जाने के दौरान भारी ठंड के बावजूद मंदिर परिसर में देश—विदेश से आये करीब ढाई हजार श्रद्धालु भी मौजूद रहे जो बम—बम भोले के नारे लगा रहे थे । 

आम श्रद्धालुओं के साथ ही प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी पहले दिन बाबा केदार के दर्शन के लिये पहुंचे । इससे पहले अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर सात मई को गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया । 

गढ़वाल हिमालय के चारधामों में से एक अन्य धाम बदरीनाथ मंदिर के कपाट कल खोले जायेंगे । हर साल अप्रैल—मई में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के शुरू होने का स्थानीय जनता को भी इंतजार रहता है । छह माह तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान देश—विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक जनता के रोजगार और आजीविका का साधन हैं और इसीलिए चारधाम यात्रा को गढ़वाल हिमालय की आर्थिकी की रीढ़ माना जाता है । 

सर्दियों में भारी बर्फवारी और भीषण ठंड की चपेट में रहने के कारण चारों धामों के कपाट हर साल अक्टूबर—नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिये जाते हैं जो अगले साल अप्रैल—मई में फिर खोल दिये जाते हैं ।