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खराब सिबिल स्‍कोर होने पर भी पा सकते हैं सस्‍ता पर्सनल लोन

इंडिया टीवी पैसा की टीम आज बताने जा रही है कि यदि आपको पर्सनल लोन की जरूरत पड़ती है तो कैसे कम ब्‍याज पर आप फटाफट लोन हासिल कर सकते हैं।

Dharmender Chaudhary
Dharmender Chaudhary 25 Apr 2016, 7:46:48 IST

नई दिल्‍ली। जिंदगी में पैसों की जरूरत वक्‍त देखकर नहीं आती। अक्‍सर बीमारी के इलाज और दूसरी जरूरतों के लिए लोग लोन लेते हैं, इसके अलावा गृहस्‍थी और परिवार की जरूरत पूरी करने के अलावा घूमने फिरने के लिए भी हम लोन लेते हैं। लेकिन बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी जरूरत के अनुसार नहीं बल्कि आपके क्रेडिट स्‍कोर और अपनी शर्तों के के आधार पर लोन देते हैं। वहीं इसमें समय भी लगता है, दूसरी ओर हो सकता है आपकी जरूरत इतना इंतजार न कर सके। बैंक की शर्तों और क्रेडिट स्‍कोर के झंझट से बचने का आसान उपाय है मॉर्गेज लोन। इसके तहत हम अपने पास रखी कोई बहुमूल्‍य वस्‍तु जैसे गोल्‍ड, बैंक एफडी, इंश्‍योरेंस पॉलिसी आदि के बदले लोन ले सकते हैं। यह सिक्‍योर्ड लोन की श्रेणी में आता है, ऐसे में इनकी ब्‍याज दरें भी पर्सनल लोन के मुकाबले सस्‍ता होती हैं। इंडिया टीवी पैसा की टीम आज बताने जा रही है कि यदि आपको पर्सनल लोन की जरूरत पड़ती है तो कैसे कम ब्‍याज पर आप फटाफट लोन हासिल कर सकते हैं।

गोल्‍ड के बदले पर्सनल लोन

अगर आपका सिबिल स्‍कोर ठीक नहीं है तो परेशान होने की जरूरत नहीं, घर पर या बैंक के लॉकर में रखे गोल्‍ड के बदले आप पर्सनल लोन ले सकते हैं, वो भी मार्केट रेट से कम ब्‍याज पर। गोल्ड लोन एक तरह का सेक्योर्ड लोन है। आप अपने सोने या सोने के आभूषण को जमानत के रूप में रखते हैं और उसके बदले आपको सस्‍ता लोन मिलता है। इसमें कागजी कार्यवाही बहुत कम होती है और गोल्ड लोन देने से पहले आपका क्रेडिट स्कोर भी चेक नहीं किया जाता। आज मुथूट फाइनेंस, मणप्पुरम जैसी गोल्‍ड लोन कंपनियों के अलावा अब ज्यादातर बैंक भी गोल्ड लोन देते हैं। गोल्ड लोन पर ब्याज दर लोन टु वैल्यू (एलटीवी) अनुपात पर निर्भर करता है। यानि कम ब्याज दर का लाभ तब ही मिलता है, जब आप जमानत रखे गए सोने के बाजार मूल्य के कम हिस्से के बराबर लोन लेना मंजूर करते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले कर्ज

पर्सनल लोन से सस्‍ता कर्ज हासिल करने में आपकी बैंक या पोस्‍टऑफिस एफडी भी काफी मददगार होती है। फिक्स्ड डिपॉजिट सोने के बाद सबसे जल्द और आसानी से लोन उपलब्ध कराता है। इसके लिए जरूरी है कि आपका फिक्स्ड डिपॉजिट कम से कम एक साल की हो। आम तौर पर इसकी ब्याज दरें फिक्स्ड डिपॉजिट की जमा दरों की तुलना में एक या दो फीसदी अधिक होती हैं। इसकी प्रोसेसिंग की अवधि बैंकों पर निर्भर करती है लेकिन अधिकतर मामलों में दो से तीन दिनों में इसकी प्रोसेसिंग हो जाती है। ब्याज की गणना कर्ज की राशि पर ही किया जाता है। आम तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट की कुल राशि के 80 प्रतिशत तक का कर्ज मिल सकता है। इसका भुगतान एफडी की अवधि के दौरान ही करना होता है।

बीमा पॉलिसियों के बदले लोन

हम सभी अपने भविष्‍य के लिए इंश्‍योरेंस करवाते हैं। लेकिन ये पॉलिस पेपर आपको वर्तमान की जरूरत के लिए सस्‍ता कर्ज भी दिलवा सकते हैं। एंडोमेंट पॉलिसियों के बदले मिलने वाला कर्ज सिक्योर्ड लोन की श्रेणी में आता है और यही वजह है कि इसकी ब्याज दरें पर्सनल लोन की तुलना में कम होती है और बेस रेट से लगभग तीन फीसदी अधिक होती हैं। एंडोमेंट पॉलिसियों के बदले प्राप्त होने वाले कर्ज की राशि पॉलिसी के सरेंडर वैल्यू पर निर्भर करती है। दूसरी बात यह है कि पॉलिसी को बैंक के नाम असाइन करना होता है। अगर कर्ज लेने वाला व्यक्ति ऋण का भुगतान समय पर कर देता है तो बैंक वापस उस व्यक्ति के नाम पॉलिसी को री-असाइन कर देता है। अगर बकाया राशि और ब्याज सरेंडर वैल्यू के बराबर हो जाती है तो पॉलिसी फोरक्लोज कर दी जाती है।

शेयर, एमएफ के बदले कर्ज

अपने निवेश को तेज गति देने के लिए सबसे बेहतर उपाय शेयर मार्केट है। आप शेयर या म्‍यूचुअल फंड में निवेश कर बेहतर रिटर्न प्राप्‍त कर सकते हैं। लेकिन ये शेयर आपको जरूरत पड़ने पर कर्ज भी दिलवा सकते हैं। इसके लिए दस्तावेज के तौर पर आइडेंटिटी, हस्ताक्षर, पते का प्रूफ, ट्रांसफर डीड, डीमैट प्लेज फॉर्म आदि की जरूरत होती है। इसकी ब्याज दरें भी पर्सनल लोन से कम ही होती हैं। आम तौर पर यह 10 -12 प्रतिशत के बीच होती हैं। सभी शेयरों या म्यूचुअल फंडों के बदले कर्ज नहीं मिल सकता। इक्विटी लिंक्ड सेंविंग स्कीम, जिसकी तीन साल की लॉक इन अवधि होती है, के बदले कर्ज नहीं मिलता है। जहां तक कर्ज की बात है तो शेयर या म्यूचुअल फंडों के यूनिटों के मौजूदा मूल्य के 50-60 प्रतिशत तक का कर्ज मिल जाता है।

लोन लेते समय इन बातों का रखें ध्‍यान

उधार चुकाने का समय कब तक है यह बात अच्छी तरह जान लें। हाउसिंग लोन, कार लोन सामान्‍यतया लंबे समय के लोन होते हैं। लेकिन जब इंश्‍योरेंस, गोल्‍ड, एफडी के बदले लोन मिलता है तो इसकी लिमिट कुछ महीनों से शुरू होकर 1 से 3 साल तक ही होती है। यह भी ध्‍यान रखें कि आपके द्वारा गिरवी रखी गई वस्‍तु के बदले बैंक 80-85% ही लोन के रूप में देते हैं। हालांकि कई प्राइवेट संस्‍थाएं 100% लोन देने को तैयार हो जाती हैं।

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