Live TV
GO
  1. Home
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. SBI सहयोगी बैंकों के विलय पर...

SBI सहयोगी बैंकों के विलय पर सरकार को जल्‍द देगी विस्तृत योजना, 9 महीने में पूरा होना है काम

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने सहयोगी बैंकों के खुद में विलय प्रस्ताव का ब्यौरा तैयार कर रहा है। इस योजना को जल्द ही मंजूरी के लिए सरकार को सौंपा जाएगा।

Abhishek Shrivastava
Abhishek Shrivastava 28 Jun 2016, 17:31:31 IST

नई दिल्‍ली। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने सहयोगी बैंकों के खुद में विलय प्रस्ताव का ब्यौरा तैयार कर रहा है। इसे जल्द ही मंजूरी के लिए सरकार को सौंपा जाएगा। सहयोगी बैंकों के स्टेट बैंक में विलय का काम अगले नौ माह में पूरा किया जाना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महीने की शुरुआत में स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का स्टेट बैंक में विलय को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी थी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, मंत्रिमंडल से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद बैंक ने छह विभिन्न इकाइयों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विलय योजना जैसे ही तैयार होती है स्टेट बैंक अधिनियम 1955 की धारा 35 के तहत अंतिम मंजूरी के लिए इसे सरकार को सौंप दिया जाएगा।

अधिकारी ने कहा कि उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ सप्ताह के भीतर इस बारे में विस्तृत ब्यौरा सौंप दिया जाएगा। बैंक की एक टीम इस पर काम कर रही है। अधिकारी ने कहा कि विलय की पूरी प्रक्रिया इस वित्त वर्ष में पूरी हो जाएगी। स्टेट बैंक के पांच सहयोगियों में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर तथा स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद शामिल हैं। इनमें से स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद सूचीबद्ध नहीं हैं।

स्टेट बैंक में पांच सहयोगी बैंकों के विलय के बाद यह एशिया के सबसे बड़े बैंकों में से एक होगा। विलय के बाद भारतीय स्टेट बैंक दुनिया के बड़े बैंकों से प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। उसका संपत्ति आधार 37 लाख करोड़ रुपए यानी 555 अरब डॉलर से अधिक होगा। अकेले स्टेट बैंक की ही 16,500 से अधिक शाखाएं हैं, जिनमें 36 देशों में फैली 191 शाखाएं भी शामिल हैं। स्टेट बैंक में सबसे पहले स्टेट बैंक ऑफ सौराष्‍ट्र का 2008 में विलय हुआ। इसके दो साल बाद स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का विलय किया गया।

Web Title: SBI सहयोगी बैंकों के विलय पर सरकार को जल्‍द देगी विस्तृत योजना