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डॉलर के मुकाबले रुपया 35 पैसे उछलकर पहुंचा 71.11 पर, ट्रंप ने कहा शुक्रिया सउदी अरब

लगातार 7वें दिन रुपए में मजबूती जारी रही। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे सुधरकर 71.12 पर खुला।

India TV Paisa Desk
India TV Paisa Desk 22 Nov 2018, 11:38:29 IST

मुंबई। लगातार 7वें दिन रुपए में मजबूती जारी रही। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे सुधरकर 71.12 पर खुला। रुपए में यह मजबूती कच्‍चे तेल की कीमतों में और गिरावट आने की वजह से आई है।

कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कुछ मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के कमजोर पड़ने और एक्‍सपोर्टर्स और बैंकों द्वारा डॉलर की बिकवाली करने से भी रुपए को समर्थन मिला है। विदेशी निवेश प्रवाह बढ़ने और कच्‍चे तेल के दाम में लगभग 7 प्रतिशत की कमी आने से रुपए की धारणा को मजबूती मिली।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपए 71.12 पर खुला और इसके बाद 35 पैसे की मजबूती दिखाते हुए 71.11 पर पहुंच गया। इससे पहले मंगलवार को रुपया 71.46 पर बंद हुआ था। बुधवार को ईद के कारण मुद्रा बाजार में अवकाश था।

कच्चे तेल में नरमी आने पर ट्रंप ने कहा शुक्रिया सउदी अरब

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कच्चे तेल की कम कीमतों के लिए बुधवार को सउदी अरब को धन्यवाद कहा। ट्रंप ने इस प्रमुख तेल उत्पादक एवं निर्यात देश के नागरिक और अमेरिकी अखबर के लिए काम करने वाले पत्रकार जमाल खशोगी की तुर्की में जघन्य हत्या के बाद उपजे विवाद के बाद भी अभी एक ही दिन पहले कहा था कि अमेरिका सउदी अरब का पक्का दोस्त बना रहेगा। 

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं। हे बहुत बढ़िया! यह तो अमेरिका और पूरी विश्व के लिए कर में बड़ी राहत की तरह है। लुफ्त उठाइए! 54 डॉलर के भाव का, अभी यह 82 डॉलर (प्रति बैरल) का था। 

ट्रंप ने कहा कि सउदी अरब आप को धन्यवाद, लेकिन अभी इसे और नीचे जाने दें। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा कि यदि हम उनसे अलग हो जाते हैं, मुझे लगता है कि कच्चा तेल आसमान छूने लग जाएगा। मैंने इसे सस्ता किया है। उन्होंने (सउदी अरब ने) कच्चा तेल को सस्ता करने में हमारी मदद की है। अभी कच्चा तेल अपेक्षाकृत सस्ता है। ट्रंप द्वारा सउदी अरब को समर्थन देने को कुछ विश्लेषक ओपेक और गैर-ओपेक देशों को दिसंबर बैठक में उत्पादन में कटौती करने से रोकने की कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है। 

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