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सरकारी बैंकों को 2017-18 में 87,000 करोड़ रुपए का घाटा, पंजाब नैशनल बैंक सबसे आगे

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सामूहिक शुद्ध घाटा 2017-18 में बढ़कर 87,357 करोड़ रुपए हो गया। यह इतनी बड़ी रकम है कि हर भारतीय को लगभग 670 रुपए मिल सकते थे। सबसे ज्यादा घाटा घोटाले की मार झेल रहे पंजाब नैशनल बैंक (12,283 करोड़ रुपए) को हुआ।

India TV Paisa Desk
Edited by: India TV Paisa Desk 10 Jun 2018, 15:01:50 IST

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सामूहिक शुद्ध घाटा 2017-18 में बढ़कर 87,357 करोड़ रुपए हो गया। यह इतनी बड़ी रकम है कि हर  भारतीय को लगभग 670 रुपए मिल सकते थे। सबसे ज्यादा घाटा घोटाले की मार झेल रहे पंजाब नैशनल बैंक (12,283 करोड़ रुपए) को हुआ। दूसरे पायदान पर आईडीबीआई बैंक रहा। कुल 21 सरकारी बैंकों में से दो बैंक - इंडियन बैंक और विजया बैंक - ने 2017-18 में मुनाफा दर्ज किया। इंडियन बैंक को 1,258.99 करोड़ रुपए और विजया बैंक को 727.02 करोड़ रुपए का लाभ हुआ। इंडियन बैंक का यह अब तक का सबसे अधिक मुनाफा है। 

बैंकों द्वारा जारी तिमाही आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष के दौरान इंडियन बैंक और विजया बैंक को छोड़कर शेष बैंकों को कुल मिलाकर 87,357 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। वहीं , 2016-17 के दौरान इन 21 बैंकों को कुल 473.72 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था। 14,000 करोड़ रुपए के घोटाले का दंश झेल रहे पंजाब नैशनल बैंक को पिछले वित्त वर्ष में 12,282.82 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में उसने 1,324.8 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था। 

पीएनबी के बाद सबसे ज्यादा घाटा आईडीबीआई बैंक को हुआ। उसका घाटा 2016-17 के 5,158.14 करोड़ रुपए से बढ़कर 2017-18 में 8,237.93 रुपए हो गया। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का शुद्ध घाटा 2017-18 में 6,547.45 करोड़ रुपए रहा , जबकि 2016-17 में उसे 10,484.1 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था। 

वहीं , देश का बैंकिंग क्षेत्र एनपीए और घोटाले एवं धोखाधड़़ी से जूझ रहा है। दिसंबर 2017 तक बैंकिंग क्षेत्र का एनपीए 8.31 लाख करोड़ रुपए रह गया। बढ़ते डूबे कर्ज के कारण बैंकों की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल है और इसके चलते 21 सार्वजनिक बैंकों में से 11 को रिजर्व बैंक ने त्वरित सुधार कार्रवाई (पीएसए) प्रणाली के अंतर्गत रखा है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने एनपीए के निपटारे के लिए एक राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी के गठन के बारे में सुझाव देने के लिए विशेषज्ञों की समिति का गठन किया गया है। समिति 15 दिनों के भीतर अपने सुझाव देगी।

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