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वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से रेलवे पर बढ़ेगा दबाव

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के कारण कारोबार में बचत की भारतीय रेलवे की कोशिशों पर चालू वित्त वर्ष के दौरान दबाव पड़ सकता है।

Abhishek Shrivastava
Abhishek Shrivastava 14 Apr 2016, 19:04:46 IST

कोलकाता। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के कारण कारोबार में बचत की भारतीय रेल की कोशिशों पर चालू वित्त वर्ष के दौरान दबाव पड़ सकता है। रेलवे बोर्ड के वित्त आयुक्त संजय मुखर्जी ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वन के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान रेलवे की लागत को समुचित स्तर पर रखने की पहल पर दबाव रहेगा।

उन्होंने कहा कि 2015-16 के दौरान रेलवे ने करीब 12,000 करोड़ रुपए की बचत की थी और 4,000 करोड़ रुपए की बचत ईंधन के मद से की गई। मुखर्जी के मुताबिक वेतन आयोग की सिफारिशों के कारण अतिरिक्त बोझ करीब 30,000 करोड़ रुपए सालाना होगा। इस अतिरिक्त बोझ से निपटने के लिए भारतीय रेल ने पिछले तीन साल में से कुछ कोष बनाया था। कुछ दायित्व इस कोष से निपटाए जाएंगे और कुछ का प्रबंध आंतरिक संसाधन पैदा कर किया जाएगा।

अब रेलवे संगमरमर, बांस की भी ढुलाई करेगी

भारतीय रेल अपनी ढुलाई की आमदनी बढ़ाने के लिए बांस, संगमरमर, वाहन और कृषि उत्पादों की ढुलाई जैसे नए बाजारों में उतरने की तैयारी कर रही है। रेलवे ने वित्त वर्ष 2015-16 में 110.7 करोड़ टन के लक्ष्य पर 110.1 करोड़ टन की मालढुलाई की। इस तरह वह ढुलाई के लक्ष्य से 52 लाख टन से अधिक से चूक गई। योजना के तहत अब रेलवे बांस, संगमरमर, वाहन, कृषि उत्पादों के परिवहन की तैयारी कर रही है। अभी इन वस्तुओं सहित कुल 40 उत्पादोंे का परिवहन मुख्य रूप से सड़क मार्ग से किया जाता है।

जानिए रेलवे से जुड़े रोचक तथ्‍य

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रेलवे में पर्याप्त निवेश नहीं हुआ

रेलवे पर किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि 1951 से 2014 के बीच क्षेत्र में पर्याप्त निवेश नहीं हुआ है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री तथा इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्‍ट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से किए गए इस अध्‍ययन में कहा गया है कि ट्रैक क्षमता में जहां सालाना आधार पर संचयी वृद्धि दर महज 0.7 फीसदी रही, जबकि यात्री तथा माल यातायात में सालाना संचयी वृद्धि दर क्रमश: 3.1 फीसदी तथा 4.3 फीसदी रही। अध्ययन में कहा गया है कि ग्राहका संतोष तथा प्रौद्योगिकी में सुधार के लिए संसाधन पर्याप्त नहीं रहा और सुरक्षा के मामले में निवेश भी अपर्याप्त रहा है।

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