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20 सरकारी बैंकों को 31 मार्च तक मिलेगी 88,000 करोड़ रुपए की पूंजी, बड़े कर्ज की होगी विशेष निगरानी

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उनके मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद योजना तैयार की है।

Abhishek Shrivastava
Edited by: Abhishek Shrivastava 24 Jan 2018, 18:27:58 IST

नई दिल्ली। सरकार ने आज पूंजी के अभाव से जूझ रहे सार्वजनिक क्षेत्र के 20 बैंकों में 88,139 करोड़ रुपए की पूंजी डालने की घोषणा की है। इसमें सबसे ज्यादा 10,610 करोड़ रुपए की पूंजी आईडीबीआई बैंक को दी जाएगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उनके मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद योजना तैयार की है। 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 2.1 लाख करोड़ रुपए की नई पूंजी डालने की योजना पिछले साल अक्‍टूबर में घोषित की गई थी। इस योजना का क्रियान्वयन दो वित्त वर्षों 2017-18 और 2018-19 में किया जाएगा। घोषणा के मुताबिक 31 मार्च को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय स्टेट बैंक को 8,800 करोड़ रुपए और बैंक ऑफ इंडिया को 9,232 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

इसके अलावा यूको बैंक को 6,507 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। पंजाब नेशनल बैंक को 5,473 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ बड़ौदा को 5,375 करोड़ रुपए, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 5,158 करोड़ रुपए,  कैनरा बैंक को 4,865 करोड़ रुपए, इंडियन ओवरसीज बैंक को 4,694 करोड़ रुपए और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 4,524 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।  
इसी प्रकार आरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को 3,571 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे, देना बैंक को 3,045 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 3,173 करोड़ रुपए, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 2,634 करोड़ रुपए, कॉरपोरेशन बैंक को 2,187 करोड़ रुपए, सिंडीकेट बैंक को 2,839 करोड़ रुपए, आंध्रा बैंक को 1,890 करोड़ रुपए, इलाहाबाद बैंक को 1,500 करोड़ रुपए और पंजाब एवं सिंध बैंक को 785 करोड़ रुपए मिलेंगे। 

जेटली ने यह घोषणा करते हुए कहा कि बैंकों की संचालन व्यवस्था उच्च मानकों वाली बनाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। बैंकों की पिछली स्थिति नहीं दोहराई जाए यह सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रणाली की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें एक बड़ी समस्या विरासत में मिली और हम इस समस्या का हल ढूंढने में लगे रहे। हमारी भूमिका न केवल निदान तलाशने तक रही बल्कि यह सुनिश्चित करने में भी रही कि जो कुछ पहले घटित हुआ वह दोबारा नहीं हो इसके लिए एक संस्थागत प्रणाली तैयार की जाए।  
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज में बड़ी राशि फंसी हुई है। इसका उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ा है। यही वजह है कि उन्हें नई पूंजी की जरूरत पड़ी है। 

जेटली ने कहा कि इस समूची पहल के पीछे यही मकसद है कि सरकार की यह सबसे बड़ी प्राथमिकता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अच्छी स्थिति में रखा जाए। वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा क्षेत्र के सचिव राजीव कुमार ने कहा कि बैंकों के लिए पुनर्पूंजीकरण का कार्य उनके प्रदर्शन और अपनाए गए सुधारों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि बैंकों के 250 करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज की विशेष निगरानी होगी। 

Web Title: Centre to infuse over Rs 88,000 cr in 20 PSU banks this fiscal