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Hindi News पैसा बिज़नेस आयकर विभाग को बेनामी संपत्ति की...

आयकर विभाग को बेनामी संपत्ति की जानकारी देकर आप बन सकते हैं करोड़पति, शुरू हुई ईनामी योजना

कोई भी बेनामी लेनदेन या संपत्ति के बारे में आयकर विभाग तक सूचना पहुंचाने वाले को एक करोड़ रुपए तक का पुरस्‍कार दिया जाएगा। वहीं विदेश में छुपा कर रखे गए कालेधन की जानकारी देने वाले को 5 करोड़ रुपए तक का ईनाम मिलेगा।

India TV Paisa Desk
India TV Paisa Desk 01 Jun 2018, 17:43:06 IST

नई दिल्ली। कोई भी बेनामी लेनदेन या संपत्ति के बारे में आयकर विभाग तक सूचना पहुंचाने वाले को एक करोड़ रुपए तक का पुरस्‍कार दिया जाएगा। वहीं विदेश में छुपा कर रखे गए कालेधन की जानकारी देने वाले को 5 करोड़ रुपए तक का ईनाम मिलेगा। इसके अलावा, इनकम टैक्‍स इंफोर्मेंट्स रिवार्ड स्‍कीम को भी संशोधित किया गया है, इसके तहत भारत में टैक्‍स चोरी करने वाले की जानकारी देने पर 50 लाख रुपए तक का ईनाम जीता जा सकता है।

सीबीडीटी ने आज बेनामी ट्रांजैक्‍शन इंफोर्मेंट्स रिवार्ड स्‍कीम 2018 की घोषणा की है, जिसके तहत कोई भी व्‍यक्ति ज्‍वॉइंट या एडिशनल कमिश्‍नर को बेनामी लेनदेन और संपत्ति के बारे में जानकारी दे सकता है। सीबीडीटी ने कहा कि इस रिवार्ड स्‍कीम का उद्देश्‍य लोगों को बेनामी लेनदेन और संपत्ति के बारे में जानकारी देने के लिए प्रोत्‍साहित करना है।

बेनामी ट्रांजैक्‍शन इंफोर्मेंट्स रिवार्ड स्‍कीम 2018 के तहत आयकर विभाग के जांच निदेशालय में बेनामी रोकथाम यूनिट के ज्‍वॉइंट या एडिशनल कमिश्‍नर को निर्धारित प्रारूप में बेनामी लेनदेन और संपत्ति के बारे में जानकारी देने पर कोई भी व्‍यक्ति 1 करोड़ रुपए तक का ईनाम पा सकता है। विभाग ने यह भी आश्‍वासन दिया है कि जानकारी देने वाले व्‍यक्ति की जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा और ऐसे व्‍यक्ति की पहचान कभी भी उजागर नहीं की जाएगी।

ब्‍लैक मनी (अनडिस्‍क्‍लोज्‍ड फॉरेन इनकम एंड असेट्स) और इम्‍पोजिशन ऑफ टैक्‍स एक्‍ट, 2015 के तहत विदेशों में छिपाकर रखे गए कालेधन के बारे में सूचना देने वाला व्‍यक्‍ति 5 करोड़ रुपए तक का ईनाम हासिल कर सकता है। विभाग ने कहा कि फॉरेन ब्‍लैक मनी एक्‍ट के तहत सूचना देने के लिए पुरस्‍कार राशि को 5 करोड़ रुपए का इसलिए रखा गया है ताकि यह विदेशों में संभावित स्रोत के लिए अधिक आकर्षक बन सके।

आयकर विभाग ने अपने एक बयान में कहा है कि कई मामलों में यह पाया गया है कि कालेधन को अन्‍य किसी के नाम पर संपत्ति में निवेश किया गया है। हालांकि वास्‍तविक मालिक के बजाये निवेश करने वाला निवेशक इसका फायदा उठाता है।