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सभी गांवों को बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करने के करीब पहुंची सरकार, सिर्फ 2 फीसदी गांव ही बचे

ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत कुल 18,452 गांवों में से लगभग दो प्रतिशत ही गांव ऐसे बचे हैं जहां बिजली पहुंचाई जानी बाकी है। ये गांव ऐसे हैं जहां आजादी के करीब 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी।

Manish Mishra
Edited by: Manish Mishra 01 Apr 2018, 12:51:53 IST

नई दिल्ली सरकार देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के करीब पहुंच गयी है। ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत कुल 18,452 गांवों में से लगभग दो प्रतिशत ही गांव ऐसे बचे हैं जहां बिजली पहुंचाई जानी बाकी है। ये गांव ऐसे हैं जहां आजादी के करीब 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए बिजली से वंचित सभी 18,452 गांवों को 1000 दिनों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा था जो मई 2018 में पूरा हो रहा है।

बिजली मंत्रालय के गर्व पोर्टल के अनुसार 31 मार्च तक कुल 18,452 गांवों में से 16,783 गांवों में बिजली पहुंचायी जा चुकी है। वहीं 1,204 गांव ऐसे हैं जहां कोई नहीं रहता जबकि 32 गांवों को चारागाह के रूप में चिन्हित किया गया है। अब केवल 433 गांव ही ऐसे बचे हैं जहां बिजली पहुंचाई जानी है। इन बचे गांवों में बिजली पहुंचाने का काम जारी है।

उल्लेखनीय है कि बिजली मंत्रालय ने काम में तेजी लाते हुए इस महत्वकांक्षी लक्ष्य को दिसंबर, 2017 तक पूरा करने का आंतरिक लक्ष्य रखा था लेकिन जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण यह पूरा नहीं हो पाया।

मंत्रालय के अनुसार अभी जो गांव बचे हैं, उसमें सर्वाधिक 296 गांव अरुणाचल प्रदेश में हैं। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में 66, छत्तीसगढ़ में 42, उत्तराखंड में 14 मध्य प्रदेश में सात, ओड़िशा में छह तथा मिजोरम में दो गांव हैं जहां बिजली पहुंचाने का काम जारी है।

वहीं दूसरी तरफ असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के सभी गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। बिजली मंत्री आर के सिंह ने कहा था कि अभी जितने गांव बचे हैं, काफी कठिन भौगोलिक स्थिति वाले हैं। लेकिन हम अप्रैल 2018 तक सभी गांवों को बिजली पहुंचाने का काम निश्चित रूप से पूरा कर लेंगे।

ग्रामीण विदयुतीकरण कार्यक्रम के तहत गांवों और घरों को बिजली पहुंचाने के लिए सरकार ने 2018-19 के बजट में 6,550 करोड़ रुपए का आवंटन किया है जो बिजली मंत्रालय के कुल 15,769.92 करोड़ रुपए का 41.53 प्रतिशत है। कुल 6,550 करोड़ रुपए में से 3,800 करोड़ रुपए गांवों में बिजली पहुंचाने तथा 2,750 करोड़ रुपए सौभाग्य (सहज बिजली हर घर योजना-ग्रामीण) के लिए है।

सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के तहत हर गांव तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। किसी भी गांव के समुदाय भवन अथवा पंचायत भवन तक बिजली पहुंच जाने पर उस गांव को विद्युतीकृत गांव मान लिया जाता है, जबकि सहज बिजली हर घर योजना के तहत बिजली से वंचित चार करोड़ घरों को रोशन करने का सरकार का लक्ष्य है। इसके तहत गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

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