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अकाल मृत्यु और इन पितरों का श्राद्ध करने से मिलेगा आज आपको विशेष लाभ, जानें तर्पण विधि

आज आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और सोमवार का दिन है। आज के दिन उन लोगों के भी श्राद्ध कार्य पूर्ण किये जायेंगे, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो या  फिर जिनका  स्वर्गवासी का करना भूल गए हो।

India TV Lifestyle Desk
Written by: India TV Lifestyle Desk 07 Oct 2018, 16:20:38 IST

धर्म डेस्क: आज आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और सोमवार का दिन है। आज चतुर्दशी तिथि वालों का श्राद्ध किया जायेगा। आज के दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को हुआ हो। साथ ही आज के दिन उन लोगों के भी श्राद्ध कार्य पूर्ण किये जायेंगे, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो, यानी जिनकी मृत्यु किसी एक्सीडेंट या किसी शस्त्र आदि से हुई हो। आपको बता दूं कि इस दिन श्राद्ध करने से व्यक्ति को किसी भी अज्ञात भय का खतरा नहीं रहता।

 

इस बार चतुर्दशी तिथि और अकाल मृत्यु वालों के श्राद्ध के साथ ही आज के दिन चतुर्दशी तिथि में ही अज्ञात तिथि वालों का श्राद्ध भी किया जायेगा। अज्ञात से यहां मतलब उन लोगों से है, जिनके स्वर्गवास की तिथि ज्ञात न हो, यानी जिनके अंतिम दिवस की तिथि न पता हो। वैसे तो हर बार अज्ञात तिथि वालों का श्राद्ध कार्य अमावस्या के दिन किया जाता है, लेकिन इस बार चतुर्दशी तिथि आज सुबह 11:32 पर ही समाप्त हो जायेगी और उसके बाद अमावस्या लगयेगी, जो कि कल के दिन सुबह 09:17 तक ही रहेगी। (11 अक्टूबर को गुरु कर रहा है वृश्चिक राशि में प्रवेश, इन 5 राशियों की लाइफ में छाएंगे संकट के बादल )

अब चूंकि श्राद्ध कार्य दोपहर के समय किये जाते हैं और आज दोपहर के समय अमावस्या तिथि रहेगी। इसलिए अज्ञात तिथि वालों का श्राद्ध कार्य आज ही के दिन किया जायेगा। साथ ही इस बार पितृ विसर्जन भी आज ही के दिन किया जायेगा और सर्वपैत्री भी आज ही मनायी जायेगी। हालांकि अमावस्या तिथि वालों का श्राद्ध कार्य कल के दिन ही किया जायेगा। (Navratri 2018: नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना, साथ ही जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि )

जो लोग श्राद्ध के बीते दिनों में किसी कारणवश अपने स्वर्गवासी पूर्वज़ों का श्राद्ध न कर पाये हों या श्राद्ध करना भूल गए हों, वो भी आज के दिन श्राद्ध कार्य करके लाभ उठा सकते हैं। हमने आपको अभी बताया है कि आज के दिन पितृ विसर्जन भी किया जायेगा। माना जाता है कि पितृ विसर्जन करके श्राद्ध के लिये धरती पर आये पितरों की विदाई की जाती है।  

पितरों की मनपंसद चीजें बनाकर श्राद्ध कार्य किये जाते हैं। कहते हैं श्राद्ध में पितरों को दिये अन्न-जल से उन्हें संतुष्टि मिलती है और वो अपने परिवार के लोगों को खुशियों का आशीर्वाद देकर वापस लौटते हैं। अतः आज के दिन अपने भूले-बिसरे पूर्वज़ों के निमित्त श्राद्ध करके लाभ जरूर उठाना चाहिए।

आज के दिन अपने पितरों के निमित्त किसी सुपात्र ब्राह्मण को भोजन जरूर कराएं। साथ ही अगर कोई जरूरतमंद या मांगने वाला घर पर आ जाये, तो उसे भी आदरसहित भोजन कराएं। इसके अलावा आज श्राद्ध के दौरान अन्य किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

श्राद्ध में तर्पण का बहुत अधिक महत्व है। तर्पण से पितर संतुष्ट और तृप्त होते हैं। अतः आज के दिन जो व्यक्ति अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध कार्य करे, वो अपने पितरों के निमित्त तर्पण भी अवश्य करे। बहुत से लोग सोचते हैं कि क्या मालूम मेरे पितर स्वर्ग में होंगे या नर्क में, मुक्त हुये होंगे या पुनर्जन्म हुआ होगा। पुनर्जन्म हुआ होगा तो मनुष्य बने होंगे या जानवर और अगर पुनर्जन्म हुआ होगा तो श्राद्ध का पिण्ड और तर्पण का जल उन तक कैसे पहुंचेगा। हमारे ऋषियों ने इस सब सम्भव पहलुओं पर विचार किया था।
 
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जिस प्रकार वर्षा का जल सीप में गिरने से मोती, कदली में गिरने से कपूर, खेत में गिरने से अन्न और धूल में गिरने से कीचड़ बन जाता है, उसी प्रकार तर्पण के जल से सूक्ष्म वाष्पकण देव योनि के पितर को अमृत, मनुष्य योनि के पितर को अन्न, पशु योनि के पितर को चारा और अन्य योनियों के पितरों को उनके अनुरूप भोजन और सन्तुष्टि प्रदान करते हैं। साथ ही जो व्यक्ति तर्पण कार्य पूर्ण करता है, उसे चारों तरफ से लाभ ही लाभ मिलता है और नौकरी व बिजनेस में सफलता मिलती है।

पितृ तर्पण की विधि
तर्पण के लिये एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें थोड़ा दूध और काले तिल मिलाकर तर्पण कार्य करना चाहिए। पितरों का तर्पण करते समय उस लोटे को हाथ में लेकर दक्षिण दिशा में मुख करके बायां घुटना मोड़कर बैठें और अगर आप जनेऊ धारक हैं, तो अपने जनेऊ को बायें कंधे से उठाकर दाहिने कंधे पर रखें और हाथ के अंगूठे के सहारे से जल को धीरे-धीरे नीचे की ओर गिराएं। इस प्रकार घुटना मोड़कर बैठने की मुद्रा को पितृ तीर्थ मुद्रा कहते हैं। इसी मुद्रा में रहकर आपको अपने सभी पितरों को तीन-तीन अंजुलि जल देना चाहिए। साथ ही ध्यान रहे कि तर्पण हमेशा साफ कपड़े पहनकर श्रद्धा भाव से करना चाहिए। बिना श्रद्धा के किया गया धर्म-कर्म तामसी तथा खंडित होता है। इसलिए श्रद्धा भाव होना जरूरी है।.

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