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Makar Sankranti 2019: ये हैं मकर संक्रांति मनाने की पौराणिक कथाएं

आज सूर्य देव जाते हैं अपने पुत्र शनि देव से मिलने इसलिए ये दिन है पिता - पुत्र के लिए बेहद खास

India TV Lifestyle Desk
Written by: India TV Lifestyle Desk 15 Jan 2019, 12:53:42 IST

मकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। इस पर्व का पुराणों में भी काफी वर्णन किया गया है। देवताओं के दिनों की गणना भी इस दिन से ही आरंभ होती है। हो सके तो आज गुड़, तेल, फल, छाता आदि का दान करना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। आज के दिन सूर्य से जो मांगा जाए वो पूरा हो जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने पर हर मनुष्य की कार्यक्षमता भी बढ़ जाती है। मकर संक्रांति पर तिल, खिचड़ी सेवन तथा इसके दान का खास महत्व है। इस दिन विशेष रूप से पतंग उड़ाई जाती है, कहा जाता है कि इससे सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं।

ये त्योहार किसी एक कारण से नहीं बल्कि अनेक कारणों से मनाया जाता है। जी हां, इस त्योहार को मनाने के पीछे कई कथाओं को याद किया जाता है। आइए जानते हैं इन कथाओं के बारे में-

माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर एक महीने के लिए उनसे मिलने जाते हैं। ये दिन खास तौर से पिता पुत्र के लिए विशेष माना जाता है, क्योंकि इस दिन पिता-पुत्र का रिश्ता निकटता के रूप में देखा जाता है। वैसे, ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल असंभव है, लेकिन सूर्य खद अपने पुत्र के घर जाते हैं। 

मकर संक्रांति पर तिल का सेवन

मकर संक्रांति को मनाने के पीछे एक कथा ये भी है कि इस दिन भगवान विष्णु ने मधु कैटभ नाम के एक राक्षस का वध किया था। उन्होंने मधु के कंधों पर मंदार पर्वत रख कर उसे दबा दिया था। इस दिन भगवान विष्णु को मधुसुधन का नाम दिया गया था। 

संक्रांति के अवसर पर पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण अवश्य करना चाहिए। कहा जाता है कि आज के दिन महाराज भागीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में तर्पण किया था। मकर संक्रांति के खास मौके पर गंगा सागर में आज भी मेला लगता है।

मकर संक्रांति पर  सूर्य की पूजा
  
महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी अपने प्राण त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन को ही चुना था। भीष्म ने मोक्ष पाने के लिए सूर्य के उत्तरायन होने के पश्चात अपने शरीर को त्यागा था। उत्तरायन में शरीर त्यागने वाले व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष मिलता है और देवलोक में रहकर आत्मा पुनः गर्भ में लौटती है। 

मकर संक्रांति के अवसर पर ही मां यशोदा ने कृष्ण जन्म के लिए व्रत किया था। उस समय सूर्य देवता उत्तरायण काल में पदार्पण कर रहे थे और तभी सूर्य देव ने मां यशोदा को उनकी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद दिया था।

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Web Title: Makar Sankranti 2019: These are legends of celebrating Makar Sankranti-Makar Sankranti 2019: ये हैं मकर संक्रांति मनाने की पौराणिक कथाएं

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