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दिन के हिसाब से रोज बदले जाते हैं अयोध्या के रामलला के वस्त्र, हर एक वस्त्र का होता है खास मतलब

आपको रामलला के बारें में एक रोचक बात नहीं पता होगी। हम आपको बताते है रामलला के रोजाना एक बच्चें की तरह कपड़े बदले जाते है। रोजाना विभिन्न रंग के कपड़े पहनाएं जाते है। जिसका एक खास मतलब होता है।

India TV Lifestyle Desk
India TV Lifestyle Desk 26 Nov 2018, 14:02:35 IST

धर्म डेस्क: पिछले 26 साल से अयोध्या में रामलला भले ही टेंट के बने मंदिर में हों और दर्शन, पूजा के लिए कानूनी पाबंदियां लगाई गई हों, लेकिन राम भक्त अपने आराध्य की एक झलक देखने के लिए देश के कोने-कोने से अयोध्या पहुंचता है।  हालांकि तय वक्त में नियम के मुताबिक भी राम लला के दर्शन की इजाजत है। रोज़ाना स्नान, श्रंगार और नए वस्त्र पहनाए जाने के बाद राम लला की आरती होती है, जिसके बाद ही श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकते हैं। आपको रामलला के बारें में एक रोचक बात नहीं पता होगी। हम आपको बताते है रामलला के रोजाना एक बच्चें की तरह कपड़े बदले जाते है। रोजाना विभिन्न रंग के कपड़े पहनाएं जाते है। जिसका एक खास मतलब होता है।  

बच्चों की तरह राम लला कपड़ों के भी बड़े शौक़ीन हैं। चटक रंग उन्हें खूब भाता है। इसके अलावा एक और खास बात ये है कि रामलला को रोज़ नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। यानी एक दिन पहनाए गए वस्त्रों को दोबारा नहीं पहनाया जाता है। इसके पीछे की क्या वजह है।

अयोध्या के रामलला के सहायक पुजारी प्रदीप दास से जब इस बारें में रिपोर्टर गोनिका अरोड़ा ने बातचीत की तो उन्होनें बताया कि राम लला को सोमवार के दिन सफेद रंग धारण किया जाता है, मंगलवार के दिन भगवान को लाल वस्त्र पहनाया जाता है, बुधवार के दिन हरा ड्रेस होता है, गुरुवार के दिन पीले वस्त्र होते हैं जो राम जन्मोत्सव में विशेष तौर पर भगवान को धारण किए जाते हैं, जो शुभ माना जाता है, शुक्रवार के दिन क्रीम कलर होता है, शनिवार को नीले, रविवार के दिन गुलाबी रंग का वस्त्र धारण किया जाता है। यही सातों दिन भगवान को वस्त्र धारण किए जाते हैं। लेकिन एक बार पहनाएं हुए वस्क्ष गोबारा इस्तेमाल नहीं किए जाते है।
 
इस खास दिन पहनाएं जाते है अलग रंग के कपड़े
राम जन्मोत्सव, रामनवमी और दिवाली जैसे त्यौहारों के मौके पर रामलला को पीले कपड़े ही धारण कराए जाते हैं। भले ही त्यौहार किसी भी दिन पड़ रहा हो। रामलला के लिए अलग से कपड़े तैयार होते हैं। कपड़ों के साथ ही रामलला को उसी रंग का दुपट्टा भी पहनाया जाता है।

कपड़े ही नहीं बिस्तर और पर्दा भी होता है उसी रंग का
जिस दिन जिस रंग के कपड़े रामलला धारण करते हैं। उसी रंग का उनका बिस्तर और पर्दा भी होता है। करीब 11 मीटर कपड़े से रामलाल के लिए एक दिन के वस्त्र तैयार होते हैं।   गर्मियों में सूत के जबकि जाड़े में मख़मल के कपड़ों से भगवान के ड्रेस तैयार किए जाते हैं।

एक ही पीढ़ी कर रही हैं रामलला के कपड़े तैयार
पुजारी ने बताया कि रामलला के लिए कपड़े तैयार करने का काम पीढ़ियों से एक ही परिवार कर रहा है। जो कि अयोध्या में प्रमोद वन इलाके में रहने वाले बाबू लाल टेलर्स की है। रिपोर्टर गोनिका अरोड़ा ने पूछताछ कि तो सामने आया कि बाबू लाल टेलर हैं। पहले इस दुकान के मुखिया कपड़े सिलते थे। अब उनके बेटे ये काम करते हैं। बाबू लाल का परिवार चार पीढ़ियों से रामलला के लिए कपड़े बना रहा है। अब ये जिम्मेदारी शंकर लाल और उनके भाई भगवत दास के पास है। हम जब यहां पहुंचे तब भी रामलाल के लिए कपड़े तैयार किए जा रहे थे।

भगवान राम के लिए कपड़े तैयार का सिलसिला हमेशा चलता है। रामलला के लिए कपड़े खास तरह से तैयार किए जाते है। ये काम हर कोई नहीं कर सकता. लेकिन शंकर लाल और उनके भाई भगवत दास अपनी पुरानी पीढ़ियों की तरह ये जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।

रामनगरी अयोध्या में करीब 6 हजार से ज्यादा मंदिर हैं। भगवत दास ने हमें बताया कि ज्यादातर मंदिरों में भगवान के कपड़ों की सिलाई की जिम्मेदारी उनके परिवार के पास ही है। वैसे तो रामलला के लिए कपड़े तैयार करने का काम रोजाना चलता रहता है, लेकिन त्यौहारों के दौरान खास तरह के वस्त्र बनाने से जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, एक और अहम बात ये भी है कि जिस रंग के कपड़े तैयार किए जाते हैं।

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