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World No Tobacco Day 2018: स्मोकिंग करने वालों को जल्द होता है इन रसायनों का असर, हो सकती है मौत

World No Tobacco Day 2018: धूम्रपान दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक है। भारत में तम्बाकू का इस्तेमाल निवारक रोगों और मृत्यु का प्रमुख कारण है। धूम्रपान करने वालों पर 7,000 से अधिक रसायनों का असर होता है, जिनमें करीब 250 रसायन प्रामाणिक तौर हानिकारक और और करीब 69 रसायन कैंसरकारी होते हैं।

India TV Lifestyle Desk
India TV Lifestyle Desk 31 May 2018, 6:47:17 IST

हेल्थ डेस्क: धूम्रपान दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक है। भारत में तम्बाकू का इस्तेमाल निवारक रोगों और मृत्यु का प्रमुख कारण है। धूम्रपान करने वालों पर 7,000 से अधिक रसायनों का असर होता है, जिनमें करीब 250 रसायन प्रामाणिक तौर हानिकारक और और करीब 69 रसायन कैंसरकारी होते हैं। क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डीजीज (सीओपीडी), हृदयधमनी रोग (सीवीडी) और फेफड़े के कैंसर के लिए धूम्रपान प्रमुख जोखिम घटक है। सीओपीडी की स्वाभाविक प्रगति में बदलाव का एकमात्र प्रमाणिक तरीका है धूम्रपान बंद करना। यह मायोकार्डियल इन्फाक्र्शन और फेफड़े का कैंसर का खतरा कम करने का भी सबसे असरदार तरीका है।

शुरुआती लक्षण
धूम्रपान करने वाले लोग फेफड़े के कैंसर के शुरुआती चरण का पता चलने पर धूम्रपान छोड़ देते हैं, जिससे मृत्यु और फेफड़े के कैंसर की पुनरावृत्ति का खतरा काफी कम हो जाता है। तम्बाकू का सेवन करने वालों में धूम्रपान करने वालों का अनुपात 35.1 फीसदी है। तम्बाकू का धूम्रपान करने वालों पर 7,000 से अधिक रसायनों का असर होता है, जिनमें करीब 250 रसायन प्रामाणिक तौर हानिकारक और और करीब 69 रसायन कैंसरकारी होते हैं।

तंबाकू के कारण होता है कैंसर
भारत में कैंसर के सभी मामलों में 30 फीसदी से ज्यादा मुंह और फेफड़ों के कैंसर के मामले हैं। भारत में मुंह के कैंसर के लगभग एक-चौथाई मामलों के पीछे तम्बाकू के इस्तेमाल का हाथ है।

तम्बाकू के धुएं में 40 से अधिक रसायनों को कैंसरकारी पाया गया है। धूम्रपान से आपके फेफड़े और श्वसन तंत्र के अन्य हिस्से भी क्षतिग्रस्त होते हैं, आपका रक्तचाप बढ़ जाता है और आपके शरीर में आक्सीजन की कमी हो जाती है। यह तम्बाकू के महज कुछ हानिकारक प्रभाव हैं।

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के चेस्ट फिजिशियन डॉ अखिलेश आर्या का कहना है, "आदत को छोड़ना निकोटीन (तम्बाकू में मौजूद उत्तेजक रसायन) के प्रति शारीरक लत के कारण ज्यादा मुश्किल हो जाता है। निकोटीन बेहद व्यसनकारी ड्रग है। यह स्नायुतंत्र को उत्तेजित करने वाले अन्य नशीले पदार्थो की तरह काफी तीव्र शारीरिक इच्छा और व्रिडॉअल सिम्प्टम्स (प्रतिकारी लक्षण) पैदा करता है।"

उन्होंने कहा, "सौभाग्य से अब ऐसे चिकित्सीय उपचार उपलब्ध हैं जिनसे व्रिडॉअल सिम्प्टम और तीव्र इच्छा को नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार के द्वारा जीवन की गुणवत्ता, दिन के समय उभरने वाले लक्षण और ब्रांकियल हाइपरऐक्टिविटी में काफी सुधार देखा जा सकता है।"

धूम्रपान करने से क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का सबसे बड़ा खतरा रहता है। लगातार धूम्रपान करने वाले हर चार में से कम से कम एक व्यक्ति को सीओपीडी होने का खतरा रहता है। दमा और सीओपीडी, दोनों में फेफड़ों की कार्यशीलता में तेजी से गिरावट होती है।

धूम्रपान नहीं करने वालों की अपेक्षा धूम्रपान करने वालों को सीओपीडी होने का तीन गुणा ज्यादा खतरा रहता है। धूम्रपान करने वाले 40 फीसदी लोगों को स्थायी ब्रांकाइटिस हो जाता है और उनमें से आधे (20 फीसदी) लोग सीओपीडी के शिकार हो जाते है। आजीवन धूम्रपान करने वालों को अपने जीवनकाल में सीओपीडी होने की 50 फीसदी संभावना रहती है।

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