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विश्व हेपेटाइटिस दिवस: दुनिया भर में लगभग 36 करोड़ लोग इस बीमारी से हैं पीड़ित, इस तरह करें बचाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि दुनिया भर में लगभग 36 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित हैं।

India TV Lifestyle Desk
Written by: India TV Lifestyle Desk 27 Jul 2018, 19:27:57 IST

हेल्थ डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि दुनिया भर में लगभग 36 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित हैं। हेपेटाइटिस लीवर में सूजन का कारण बनता है, और यह सिरोसिस जैसे गंभीर विकार की वजह भी बन सकता है। इसके अलावा हेपेटाइटिस से पुरुषों में बांझपन का भी खतरा पैदा हो सकता है।

आपको बता दें कि विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई, 2018) हर साल मनाया जाता है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाए जाने का उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस के लिए जागरूक करना है। लोगों में जागरुकता न होने के कारण लोग सही समय पर हेपेटाइटिस का टीका नहीं लगवाते हैं, जिसके कारण यह बीमारी बढ़ती जाती है। हेपेटाइटिस होने पर ये शरीर में कई तरह अन्य दिक्कतों का भी कारण बनती है। हाल ही में आए विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में हेपेटाइटिस का असर उनकी फर्टिलिटी पर पड़ता है। यानि हेपेटाइटिस पुरुषों में बांझपन का कारण बनता है।

डब्लूएचओ की रिपोर्ट से पता चला है कि हेपेटाइटिस बी वायरस वाले पुरुषों में बांझपन की आशंका 1.59 गुना अधिक रहती है। हेपेटाइटिस बी वायरस प्रोटीन शुक्राणु की गतिशीलता और शुक्राणुओं की निषेचन दर को कम करने के लिए जाना जाता है। 

दिल्ली में आईवीएफ एवं इन्फर्टिलिटी के डायरेक्टर एवं फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनीकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ. ऋषिकेश डी. पाई ने कहा कि हेपेटाइटिस का अंडाशय या गभार्शय ग्रंथियों के सामान्य कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि इस वायरस से पुरुषों में शुक्राणुजनन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे शुक्राणुओं की संख्या, टेस्टोस्टेरोन के स्तर, गतिशीलता और व्यवहार्यता में कमी आती है, जिससे उत्पादकता और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है।(मुंह के अंदर दिखे ये लक्षण तो हो सकते हैं कैंसर के संकेत)

उन्होंने कहा कि विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर आज की जरूरत है कि बांझ दम्पत्तियों में एचबीएसएजी और एचसीवी के परीक्षण की पेशकश की जाए। इससे उन्हें प्रजनन क्षमता पर कुछ स्पष्टता प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और वे अपने साथी या बच्चे को यह रोग स्थानांतरित करने से बच सकेंगे।(रोजाना जिस बोतल में पीते हैं पानी, कर सकता है आपको बीमार)

 

हेपेटाइटिस क्या है
आपके मन ये सवाल आ रहा होगा कि आखिरकार हेपेटाइटिस क्या है? आपको बता दें कि हेपेटाइटिस होने पर यकृत (लीवर) में सूजन हो जाती है। यह आगे चलकर यकृत कैंसर का कारण भी बन जाता है।(जल्दी में करना है वजन कम तो रोजाना पीएं खीरे और अदरक का जूस, इस तरह बनाएं)

पूरी दुनिया में 36 करोड़ से ज्यादा लोग हेपेटाइटिस से ग्रसित
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 36 करोड़ से ज्यादा लोग हेपेटाइटिस के गंभीर वायरस से संक्रमित हैं। अगर बात की जाए भारत के संदर्भ में तो भारत में 4 करोड़ लोग इस वायरस के संक्रमण से घिरे हुए हैं। ये सभी हेपेटाइटिस बी के वायरस से इंफेक्टेड हैं।

हेपेटाइटिस बी से ऐसे करें बचाव:-

कुछ भी खाने से पहले हाथों को जीवाणुनाशक साबुन या फिर हैंड सैनिटाइजर से साफ करना चाहिए।
व्यक्तिगत व सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता रखनी चाहिए।
अस्वच्छ व अस्वास्थ्यकर पानी न पिएं।
सड़कों पर लगे असुरक्षित फूड स्टालों के खाद्य पदार्र्थों से परहेज कर हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई वायरस से बचाव किया जा सकता है।
हेपेटाइटिस ए से बचाव के लिए टीका(वैक्सीन) भी उपलब्ध है। इस वैक्सीन को लगाने के बाद आप ताउम्र हेपेटाइटिस ए से सुरक्षित रह सकते हैं। हेपेटाइटिस ई की वैक्सीन के विकास का कार्य जारी है, जिसके भविष्य में उपलब्ध होने की संभावना है।

इन दोनों प्रकार के हेपेटाइटिस को पैदा करने वाले वायरस दूषित इंजेक्शनों के लगने, सर्जरी से संबंधित अस्वच्छ उपकरणों, नीडल्स, और रेजरों के इस्तेमाल के जरिये हेपेटाइटिस से ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। जांच किए बगैर रक्त के चढ़ाने से भी कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित हो सकता है। नवजात शिशु की मां से भी हेपेटाइटिस बी का वायरस शिशु को संक्रमित कर सकता है, बशर्ते कि बच्चे की मां हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त हो।

बच्चे को टीका लगाकर इस रोग की रोकथाम की जा सकती है। एड्स के वायरस की तरह हेपेटाइटिस बी और सी असुरक्षित शारीरिक संबंध स्थापित करने से भी हो सकता है। फिलहाल हेपेटाइटिस सी की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए हेपेटाइटिस सी की रोकथाम डिस्पोजेबल नीडल और र्सिंरज का इस्तेमाल कर की जा सकती है। रक्त और इससे संबंधित तत्वों को स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले लोगों से ही लें।           

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