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‘बेहतर भारत’ पर सिंघवी और ‘नए भारत’ पर मोदी का नजरिया एकसमान: वेंकैया नायडू

नायडू ने आज कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की पुस्तक ‘स्ट्रेट टॉक’ का विमोचन करते हुए वैचारिक विषमता को राजनीतिक शत्रुता में तब्दील करने की प्रवृत्ति से बचने की अपील करते हुए यह बात कही...

Bhasha
Reported by: Bhasha 30 May 2018, 21:49:52 IST

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने राजनीतिक दलों से जनता में अपना विश्वास बहाल करने के लिए देशहित में मिलकर काम करने की अपील करते हुए कहा है कि ‘बेहतर भारत’ को लेकर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और ‘नए भारत’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नजरिया एक समान है जिसका मकसद देश के प्रत्येक नागरिक के सपनों और अपेक्षाओं को पूरा करना है। नायडू ने आज कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की पुस्तक ‘स्ट्रेट टॉक’ का विमोचन करते हुए वैचारिक विषमता को राजनीतिक शत्रुता में तब्दील करने की प्रवृत्ति से बचने की अपील करते हुए यह बात कही।

इस दौरान नायडू ने संसद की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने वाले सदस्यों को स्वत: निलंबित करने के सिंघवी के सुझाव को बेहतर बताते हुये राज्यसभा की कार्यवाही के प्रक्रिया संबंधी नियमों की समीक्षा के लिये गठित समिति द्वारा इस सुझाव पर विचार करने की उम्मीद जतायी है। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही को लगातार और लंबे समय तक बाधित करने की समस्या चिंता पैदा करती है। नायडू ने कहा ‘‘मुझे खुशी है कि कार्यवाही बाधित करने वाले सदस्यों के स्वत: निलंबन के सिंघवी के सुझाव में मेरी चिंता की ध्वनि साफ सुनाई देती है।’’

नायडू ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही के प्रक्रिया संबंधी नियमों की समीक्षा के लिये एक समिति गठित की है जिससे सदन की कार्यवाही को सुचारु बनाने के उपाय खोजे जा सकें। उन्होंने बताया कि इस समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है और अगले महीने इसकी अंतरिम रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति सिंघवी के इस सुझाव पर भी विचार करेगी।

राजनीतिक विद्वेष के बारे में नायडू ने कहा कि सियासी दलों का एक दूसरे के लिए प्रतिद्वंद्वी होना उचित है लेकिन आपसी शत्रुता को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस अंतर को समझने की अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि शत्रुता सिर्फ विनाश का कारण बनती है।

उन्होंने विधायिका के सदस्यों के लिए योग्यता के पैमानों का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए सामर्थ्य, चरित्र और व्यवहार जरूरी गुण हैं। लेकिन इनकी जगह जाति, समुदाय, भ्रष्ट आचरण और आपराधिक बाहुबल स्वीकार्य नहीं हैं।

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