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भीमा-कोरेगांव केस: सुप्रीम कोर्ट ने पांचों गिरफ्तार आरोपियों को नजरबंद रखने का आदेश दिया

भीमा-कोरेगांव केस में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार पांचों आरोपियों को नजरबंद रखने का आदेश दिया है।

Bhasha
Reported by: Bhasha 29 Aug 2018, 17:37:02 IST

नयी दिल्ली: भीमा-कोरेगांव मामले के सिलसिले में गिरफ्तार पांच वामपंथी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन पांचों को अपने घरों में नजरबंद रखा जाए। इन लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में में इतिहासकार रोमिला थापर और चार अन्य कार्यकर्ताओं ने आज उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा कल गिरफ्तार किये गये इन कार्यकर्ताओं पर माओवादियों से संपर्क का संदेह है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस याचिका का उल्लेख कर इस पर आज ही सुनवाई करने का अनुरोध किया था। न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई के लिये तैयार हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि गिरफ्तार लोगों को जेल या पुलिस हिरासत में न रखकर हाउस अरेस्ट यानी अपने घर में नजरबंद रखा जाए। इसकी सुनवाई अगले हफ्ते होगी।

याचिका दायर करने वालों में रोमिला थापर के अलावा प्रभात पटनायक, देवकी जैन, सतीश देशपाण्डे और माजा दारूवाला शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पीठ से कहा कि महाराष्ट्र पुलिस द्वारा कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की वजह से असाधारण परिस्थिति उत्पन्न हो गयी है जिस पर यथाशीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है। 

न्यायालय में दायर याचिका में इन कार्यकर्ताओं की रिहाई का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, इन गिरफ्तारियों के मामले की स्वतंत्र जांच कराने का भी अनुरोध याचिका में किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित झूठे आरोपों की बारीकी से जांच पड़ताल की जाये। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि असहमति की आवाज को दबाने के लिये ये गिरफ्तारियां हुयी हैं। इन कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारियों के संबंध में महाराष्ट्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगने का भी आग्रह याचिका में किया है।

याचिका में कहा गया है कि इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून का इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण है और यह असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है क्योंकि इन कार्यकर्ताओं का किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल होने या इसके लिये उकसाने का कोई इतिहास नहीं है। पुणे के निकट कोरेगांव-भीमा गांव में पिछले साल 31 दिसंबर को आयोजित एलगार परिषद के बाद दलितों और सवर्ण जाति के पेशवाओं के बीच हिंसा की घटनाओं के सिलसिले में चल रही जांच के दौरान कल देश के कई हिस्सों में छापे मारे गये थे।

इस कार्रवाई में तेलुगू कवि वारावरा राव को हैदराबाद से और कार्यकर्ता वर्मन गोन्साल्विज तथा अरूण फरेरा को मुंबई से गिरफ्तार किया गया जबकि ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को फरीदाबाद और गौतम नवलखा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। इस बीच, गौतम नवलखा की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय अपराह्न सवा दो बजे सुनवाई करेगा। इसी तरह, सुधा भारद्वाज के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कल आदेश दिया था कि महाराष्ट्र पुलिस को ट्रांजिट हिरासत मिलने तक उनके ही घर में रखा जाये।

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Web Title: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ थापर और अन्य की याचिका पर पौने चार बजे होगी सुनवाई - Supreme Court to hear plea challenging arrests of Varavara Rao, 4 others

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