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गणतंत्र दिवस: क्या आप जानते हैं पाकिस्तान को टॉस में हराकर भारत ने जीती थी राष्ट्रपति की बग्घी

आजादी के वक्त जब भारत के दो हिस्से हुए तो उस वक्त इस शाही बग्घी को लेकर काफी विवाद हुआ। भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों ने इस बग्घी पर अपना दावा जताया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये था कि आखिर ये शाही बग्घी किसे दिया जाए।

IndiaTV Hindi Desk
Edited by: IndiaTV Hindi Desk 26 Jan 2018, 13:28:48 IST

नई दिल्ली: आज जमाना रफ्तार का है लेकिन राष्ट्रपति की शाही सवारी बग्घी की बात ही अलग है। इस बग्घी में जितना सोना लगा है उससे महंगी से महंगी कार खरीदी जा सकती है। राष्ट्रपति की ये शाही बग्घी इतिहास को खुद में समेटे हुए है। ये बग्घी आजादी की लड़ाई की कहानी बयां करती है और आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने बग्घी पर दावा किया था जिसका फैसला टॉस करके किया गया। आजादी से पहले वायसराय और आजादी के बाद के कई साल तक देश के राष्ट्रपति इस शाही बग्घी की सवारी करते आए हैं। इस फेहरिस्त में देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू से लेकर प्रणब दा तक का नाम शामिल है। भारत में संविधान लागू होने के बाद 1950 में हुए पहले गणतंत्र दिवस समारोह में देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद बग्घी पर ही सवार होकर गणतंत्र दिवस समारोह में पहुंचे थे।

आजादी के वक्त जब भारत के दो हिस्से हुए तो उस वक्त इस शाही बग्घी को लेकर काफी विवाद हुआ। भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों ने इस बग्घी पर अपना दावा जताया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये था कि आखिर ये शाही बग्घी किसे दिया जाए। लिहाजा इसके लिए एक नायाब तरीका ढूंढा गया। इसके लिए वायसराय की अंगरक्षक टुकड़ी के तत्कालीन हिंदू कमांडेंट और मुस्लिम डिप्टी कमांडेंट के बीच सिक्का उछालकर टॉस किया गया। टॉस में भारत की जीत हुई और ये बग्घी हमेशा-हमेशा के लिए भारत की होकर रह गई।

राष्ट्रपति की ये शाही बग्घी बेहद ही खास है। सोने से सजी-धजी इस बग्घी के दोनों ओर भारत का राष्ट्रीय चिह्न सोने से अंकित है। इसे खींचने के लिए 6 घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। ये घोड़े भी विशेष नस्ल के होते हैं। इसके लिए खास तौर से भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई मिक्स ब्रीड के घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। आजादी के बाद 1950 से लगातार 1984 तक सरकारी कार्यक्रमों में बग्घी का इस्तेमाल होता था।

गणतंत्र दिवस पर हुई इस्तेमाल
साल 1950 में जब पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया तब देश के पहले राष्ट्रपति डॉ। राजेंद्र प्रसाद इसी बग्घी में बैठकर समारोह तक गए थे। इसी बग्घी में बैठकर राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद शहर का दौरा भी करते थे। इस बग्घी में राष्ट्रपति के आने की परंपरा कई सालों तक चलती रही, लेकिन इंदिरा गांधी हत्याकांड के बाद सुरक्षा कारणों से इस परंपरा को रोक दिया गया। इसके बाद से राष्ट्रपति बुलेट प्रूफ गाड़ी में आने लगे।

प्रणब मुखर्जी ने बदली रीत
राष्ट्रपति के बुलेट प्रूफ गाड़ी में आने की रीत को साल 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बदल दिया। करीब 20 साल बाद वे बग्घी में बैठकर 29 जनवरी को होने वाली बीटिंग रिट्रीट में शामिल होने पहुंचे।

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Web Title: गणतंत्र दिवस: क्या आप जानते हैं पाकिस्तान को टॉस में हराकर भारत ने जीती थी राष्ट्रपति की बग्घी - Republic Day: After Independence, India won President's Buggy from Pakistan in a toss