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Rajat Sharma Blog: भीड़ द्वारा हत्या के मुद्दे पर सभी दलों के नेताओं को सबसे पहले भावनाओं को भड़काने से बचना चाहिए

बीजेपी, कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल के नेताओं को इस मुद्दे पर बयान देना बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इन नेताओं के बयानों से पूरे देश में माहौल खराब होता है। भीड़तंत्र को बढ़ावा मिलता है।

Rajat Sharma
Written by: Rajat Sharma 24 Jul 2018, 18:36:44 IST

राजस्थान में अलवर के पास एक गांव में पिछले शुक्रवार को स्वयंभू गोरक्षकों ने एक मुस्लिम युवक रकबर खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी। यह घटना ऐसे समय में हुई जब केंद्र और सुप्रीम कोर्ट देश के कई हिस्सों में भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाओं को लेकर माथापच्ची कर रहे थे। अलवर में शुक्रवार को हुई इस घटना के बाद कांग्रेस और बीजेपी के नेता ट्वीट और बयानों के जरिए एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगा रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि 'उनके (मोदी) क्रूर न्यू इंडिया में मानवता की जगह हिंसा ने ले ली है'। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर राहुल गांधी पर पलटवार किया, 'आप (राहुल) चुनावी फायदे के लिए समाज को बांटते हैं और फिर घड़ियाली आंसू बहाते हैं। अब बहुत हो गया। आप नफरत के व्यापारी हैं।' स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद जैसे कई वरिष्ठ मंत्रियों ने भी कांग्रेस पर पलटवार किया।

भीड़ द्वारा हिंसा की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए केंद्र ने एक मंत्रियों के समूह (GoM) का गठन किया है। इसके साथ ही गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया गया है जो अपने सुझाव गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली मंत्रियों के समूह को सैंपेगी। यह समिति पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का अध्ययन करेगी, राज्य सरकारों से बातचीत करेगी फिर अपनी रिपोर्ट मंत्रियों के समूह को सौंपेगी। 

निश्चित तौर पर इन सबमें समय लगेगा, लेकिन इस दौरान कुछ समय के लिए एक तात्कालिक कदम उठाया जा सकता है। बीजेपी, कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल के नेताओं को इस मुद्दे पर बयान देना बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इन नेताओं के बयानों से पूरे देश में माहौल खराब होता है। भीड़तंत्र को बढ़ावा मिलता है। उदाहण के लिए अगर कोई विधायक कहे कि गोतस्करी और गोहत्या के खिलाफ युद्ध चल रहा है, वहीं कोई दूसरा नेता यह कहे कि हिन्दू तालिबानी हैं और तीसरा नेता कहे कि गोरक्षा की आवाज उठाने वाले दहशतगर्द हैं तो इस तरह के सभी बयान बेकार के तनाव को जन्म देते हैं। ऐसे नेताओं के मुंह पर ताला लगना बहुत जरूरी है।

यह देखा गया है कि भीड़ द्वारा हिंसा की ज्यादातर घटनाओं में सोशल मीडिया के माध्यम से फैली फर्जी खबरें अहम भूमिका निभाती हैं और अकेले सरकार इसे रोक नहीं सकती। स्थानीय नेताओं को इसमें कोशिश करनी होगी और भीड़ को हिंसा पर उतारू होने से पहले समय पर उन्हें रोकना होगा। हालांकि फर्जी खबरों और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया सर्विस मुहैया करानेवाले व्हाट्स एप और फेसबुक ने कदम उठाए हैं, लेकिन फिलहाल जमीनी स्तर पर इसका कोई खास असर दिखाई नहीं दिया। एक सवाल ये भी है कि आखिर सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें जनता तक पहुंच जाती हैं, भीड़ इक्कठा हो जाती है और किसी की जान ले लेती है, लेकिन इन अफवाहों से पुलिस की स्थानीय खुफिया ईकाई (लोकल इंटेलीजेंस यूनिट) अनजान क्यों रहती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लोकल इंटेलीजेंस की कार्यप्रणाली को मजबूती से खड़ा करने की जरूरत है। (रजत शर्मा)

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Web Title: Rajat Sharma Blog: भीड़ द्वारा हत्या के मुद्दे पर सभी दलों के नेताओं को सबसे पहले भावनाओं को भड़काने से बचना चाहिए: On mob lynching issue, all political leaders should first refrain from igniting passions