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यदि सफल हो जाता नीरव मोदी का यह प्लान को पीएनबी नहीं देश को होता भारी नुकसान

नीरव मोदी के पिता दीपक मोदी का व्यापार पहले बड़ा था लेकिन उनके आचरण के काऱण उनका व्यापार सिमट गया। यही वजह है कि दीपक मोदी ने बेटे नीरव को उसके मामा मेहुल चोक्सी के यहां हीरा उद्योग के हुनर सीखने भेजा।

यदि सफल हो जाता नीरव मोदी का यह प्लान को पीएनबी नहीं देश को होता भारी नुकसान

फंडिग को लेकर तो घपलेबाजी हुई ही साथ ही साथ नीरव ने अपनी कंपनी में 344.4 करोड़ की बोगस पर्चेज दिखाई थी। नीरव के काला घोडा स्थित स्टोर में भी बोगस रिटेल सेल दिखाई जबकि उसका माल किसी ने खरीदा ही नहीं था। इसके अलावा गीतांजलि ग्रुप में 2021 करोड़ की फर्जी खरीददारी का भी पता चला। सबसे हैरान करने वाला खुलासा इनकम टैक्स की रिपोर्ट में ये हुआ कि नीरव ने 515 करोड़ रुपये का इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन किया था जिसकी कहीं कोई एंट्री ही नहीं है।

नीरव मोदी की फायरस्टार इंटरनेशनल कंपनी की वैल्यू छह हजार करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। नीरव मोदी की कंपनी भारत, अमेरिका समेत लंदन, हॉन्गकॉन्ग और दुनिया के कई देशों में कारोबार करती है लेकिन अब अलग-अलग एजेंसियों की जांच से पता चल रहा है कि ये फायरस्टार कंपनी ही सारे घोटाले की जड़ में है। हाइप्रोफाइल हॉलीवुड बॉलीवुड में अपने इमेज को चमकाने के लिए वो नीरव मोदी के नाम से हीरे बेचता था लेकिन सारे फिनांसियल ट्रांजेक्शन फायरस्टार कंपनी के नाम से किया करता था। पीएनबी घोटाले में भी ये कंपनी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

पंजाब नेशनल बैंक को 11 हजार करोड़ का चूना लगाने वाले नीरव मोदी का प्लान और भी बड़ा था। अगर नीरव मोदी अपने प्लान में कामयाब होता तो घोटाला और भी बड़ा होता। अभी सिर्फ बैंक को नुकसान हुआ है, अगर प्लान के मुताबिक सब चलता तो आम निवेशकों के पैसे भी नीरव मोदी की जेब में होते। दरअसल, नीरव मोदी लगातार अपने कारोबार को बढ़ाने में जुटा हुआ था। जनवरी में पीएनबी को इस घोटाले का पता लगने और सीबीआई की जांच शुरू करने से पहले ही नीरव अपनी कंपनी का आईपीओ लाने की तैयारी में था। मतलब ये कि वो अब फायरस्टार कंपनी के जरिए बाजार से फंड जुटाना चाहता था।

इंडिया टीवी को जानकारी मिली है कि नीरव मोदी अपनी कंपनी का 1000 करोड़ का आईपीओ लाने वाला था। अगर नीरव दिसंबर में आईपीओ लाता तो शेयर बाजार भी उसके इस जाल में फंस जाता। बैंक के साथ नीरव मोदी निवेशकों के पैसे भी ले उड़ता। जाहिर है अगर शेयर बाजार उसके प्लान में फंसता तो यह घोटाला और भी बड़ा हो सकता था। नीरव ने आईपीओ लाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। आईपीओ लाने से पहले ही नीरव मोदी की कंपनी ने 495 करोड़ रुपए जुटा लिए थे। यह रकम विदेशी निवेशकों के जरिए जुटाई गई थी। मतलब साफ है कि नीरव मोदी बैंको को लूटने के बाद आम निवेशकों को लूटने की फिराक में था लेकिन उससे पहले ही वो एक्पोज हो गया।

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