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कश्मीर पर नेहरू सही थे या श्यामा प्रसाद मुखर्जी, इतिहास देगा जवाब: अरुण जेटली

गुलाम नबी आजाद ने मौजूदा केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार साल के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में स्थित बहुत खराब हुई है, उनके आरोपों का जवाब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिया

Manoj Kumar
Reported by: Manoj Kumar 03 Jan 2019, 16:50:59 IST

नई दिल्ली। राज्य सभा में गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के ऊपर चर्चा हुई और इस चर्चा में कांग्रेस की तरफ से नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने मौजूदा केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार साल के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में स्थित बहुत खराब हुई है, उनके इन आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र के साथ कांग्रेस ने जितना खिलवाड़ किया है उतना इतिहास में किसी भी पार्टी ने नहीं किया है।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में इस्लाम सिर्फ 600 साल पुराना है, कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुसलमानों का खून एक ही है। उन्होंने कहा कि 1947 में कश्मीरियों ने भारतीय फौज के साथ मिलकर पाकिस्तानी सेनाओं को खदेड़ा था। मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी जम्मू-कश्मीर ने भारत के साथ रहने का फैसला किया था।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी ने कश्मीर में अपनी तरफ से कई प्रयास किए हैं, उन्होंने पिछली मनमोहन सरकार के कार्यकाल को कश्मीर के लिए स्वर्णिम काल बताया। उन्होंने ये भी कहा कि अटल जी के कार्यकाल में कश्मीर समस्या को हल किए जाने का काफी प्रयास हुआ था और अगर उस समय अगर अटल जी की पार्टी ने उनका साथ दिया होता तो शायद कश्मीर समस्या हल हो गई होती।

गुलाम नबी आजाद के आरोपों का जवाब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिया, उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या पिछले साढ़े चार साल में पैदा नहीं हुई है, और ऐसा भी नहीं है कि 1947 से लेकर 2014 तक कश्मीर का स्वर्णिम दौर चल रहा था। वित्त मंत्री ने 1947 में हुई लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय फौज भेजने में देरी क्यों की गई, और जब फौज भेजी गई और हमारी सेना आगे बढ़ रही थी तो बीच में ही सीज फायर की घोषणा क्यों कर दी गई यहां तक की उस समय के गृह मंत्री तक को सीज फायर की जानकारी रेडियो से पता चली। उन्होंने कहा कि अगर इसकी जम्मेदारी अगर आप मौजूदा गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर डालेंगे तो वह इतिहास का मजाक बनाना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर के अलग असतित्व की कल्पना को 71 साल हो गए हैं और 71 में यह यात्रा अलग अस्तित्व से विलय की तरफ न बढ़कर अलगाव की तरफ बढ़ी है, कभी न कभी इतिहास इसपर बहुत कठोर टिप्पणी करेगा जिन्होंने अलग अस्तित्व की कल्पना का निर्माण किया।

वित्त मंत्री ने कहा कि 1957, 1962 और 1967 में जम्मू कश्मीर में चुनाव हुए वे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ था। उन्होंने कहा कि शायद इस देश के इतिहास में लोकतंत्र के साथ इतनी बड़ा खिलवाड़ किसी ने नहीं किया जितना कांग्रेस पार्टी ने किया, एक कानून बना दिया गया कि पूरी घाटी में सारे नॉमिनेशन सिर्फ एक आदमी यानि मैजिस्ट्रेड अब्दुल खालिक के सामने दायर होंगे और नामांकन उन्हीं को देने होते थे। उस समय कई लोगों के नामांकन रद्द कर दिये जाते थे, कइयों के पहुंचने ही नहीं दिए जाते थे, मजाक होता था कि कश्मीर में दो तरह के एमएलए हैं एक खालिक एमएलए और दूसरा जनता एमएलए।

वित्त मंत्री ने गुलाम नबी आजाद के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौर को राज्य का स्वर्णिम दौर कहा था। उन्होंने कहा कि उस उस गोल्डन पीरियड में तो पत्थरबाजी शुरू हुई थी। पत्थरबाजी के पीछे कारण था कि आतंवादियों से लड़ने की क्षमता सुधर रही थी, पूरा विश्व कभी भी इस मूड में नहीं ता कि हम स्वीकर करें कि आतंकवाद के ऊपर कहीं जीत हासिल की जाए, ऐसे में आतंकियों और हुरियत में सोच बदली और 2010 में उन्होंने अपनी रणनीति बदली और उसके तहत पत्थरबाजी को हथियार बनाया।

वित्त मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ब्लेम गेम में गए तो कांग्रेस का ज्यादा नुकसान होगा, जब लोग पूछेंगे कि कश्मीर पर नेहरू की नीति ज्यादा अच्छी थी या श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तो इतिहास इसका जवाब देगा।

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Web Title: कश्मीर पर नेहरू सही थे या श्यामा प्रसाद मुखर्जी, इतिहास देगा जवाब: अरुण जेटली