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अलविदा अटल: नहीं रहे भारतीय राजनीति के करिश्माई नेता अटल बिहारी वाजपेयी, पूरे देश में शोक की लहर, कल शाम 4 बजे होगा अंतिम संस्कार

भारतीय राजनीति के करिश्माई नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लम्बी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया।

IndiaTV Hindi Desk
Edited by: IndiaTV Hindi Desk 17 Aug 2018, 0:06:39 IST

नयी दिल्ली: भारतीय राजनीति के करिश्माई नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लम्बी बीमारी के बाद आज यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। उन्होंने संकट के कई अवसरों पर देश को नेतृत्व प्रदान किया और समावेशी राजनीति को आगे बढ़ाते हुए बखूबी गठबंधन सरकार चलायी। देश के सम्मानित राजनेता के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘‘अटल जी के अनुकरणीय नेतृत्व ने 21वीं सदी के समृद्ध और समावेशी भारत की नींव रखी।’’ 

पूर्व प्रधानमंत्री के निधन की जानकारी देते हुए एम्स के मीडिया एवं प्रोटोकाल डिविजन की अध्यक्ष प्रो. आरती विज ने दी। उन्होंने एक विज्ञप्ति में कहा कि गहरे शोक के साथ हम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की सूचना दे रहे हैं। एम्स के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री का निधन आज शाम पांच बजकर पांच मिनट पर हुआ। 

विज्ञप्ति में कहा गया है कि वाजपेयी को 11 जून 2018 को एम्स में भर्ती कराया गया था और डाक्टरों की निगरानी में पिछले नौ सप्ताह से उनकी हालत स्थिर बनी हुई थी। एम्स के अनुसार, दुर्भाग्यवश, उनकी स्थिति पिछले 36 घंटों में बिगड़ी और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया । हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद आज हमने उन्हें खो दिया। एम्स ने कहा कि हम पूरे देश को हुई इस अपूरणीय क्षति एवं दुख में शरीक हैं। 

सुबह से ही एम्स में बड़े नेताओं और शुभचिंतकों का तांता लगना शुरू हो गया था​
वाजपेयी की तबीयत के नाजुक होने की खबर मिलने के साथ ही आज सुबह से ही एम्स में बड़े नेताओं और शुभचिंतकों का तांता लगना शुरू हो गया था। वाजपेयी के निधन की सूचना मिलते ही भाजपा मुख्यालय शोक में डूब गया। मोदी ने ट्वीट कर वाजपेयी के निधन को ‘व्यक्तिगत और अपूरणीय’ क्षति करार देते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में उनकी दूरदर्शी नीतियों का प्रभाव भारत के हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ा। 

सात दिन का राजकीय शोक 
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अटल जी की दृढ़ता और संघर्षों से भाजपा का क्रमिक निर्माण हुआ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के संदेश के प्रसार के लिए उन्होंने देश के एक कोने से दूसरे कोने तक का दौरा किया। इससे भाजपा राष्ट्रीय राजनीति और कई राज्यों में मजबूत ताकत बनी।’’ सरकार ने वाजपेयी के सम्मान में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। 

कार्यकाल पूरा करने वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री 
साल 1947 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने वाले वाजपेयी देश में एक दिग्गज नेता के रूप में उभरे और कार्यकाल पूरा करने वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे। भाषाओं, विचारधाराओं और संस्कृतियों के भेद से परे एक कद्दावर और यथार्थवादी करिश्माई राजनेता, वाजपेयी एक प्रबुद्ध वक्ता और शांति के उपासक होने के साथ साथ हरदिल अजीज और मंझे हुए राजनीतिज्ञ भी थे। आज शाम वाजपेयी के पार्थिव शरीर को कृष्णा मेनन मार्ग स्थित उनके आवास ले जाया गया, जहां विभिन्न राजनीतिक हलकों के नेताओं और विभिन्न पेशे से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने​
भाजपा की उदार छवि के नेता समझे जाने वाले वाजपेयी सबसे पहले 1996 में प्रधानमंत्री बने। हालांकि उनकी सरकार महज 13 दिन तक चली। इसके बाद वह 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने लेकिन उनकी वह सरकार 13 महीनों तक ही चली। आखिरकार 1999 में राजग एक बार फिर सत्तासीन हुई और वाजपेयी ने अपना कार्यकाल पूरा किया। अविवाहित रहे वाजपेयी 1957 में पहली बार उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से लोकसभा के लिए चुने गए। संसद में उनके पहले भाषण से उनके साथियों और सहयोगियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने एक विदेशी अतिथि से वाजपेयी का परिचय कुछ इस प्रकार कराया था-‘‘एक दिन यह युवक देश का प्रधानमंत्री बनेगा।’’ वह 47 साल तक सांसद रहे। वह दस बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे। 

11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था
पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को गुर्दे और मूत्राशय में संक्रमण एवं सीने में जकड़न की शिकायत पर 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह से पीड़ित वाजपेयी का सिर्फ एक ही गुर्दा काम कर रहा था। 2009 में स्ट्रोक के कारण उनकी संज्ञानात्मक क्षमता क्षीण हो गयी थी। इसके बाद उन्हें डिमेंशिया हो गया था। 

25 दिसंबर, 1924 को हुआ था जन्म
वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक स्कूल टीचर कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा देवी के घर हुआ था। वर्तमान में उनके जन्म दिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई की। उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से एमए किया। कम्युनिज्म से थोड़े दिन के लगाव के बाद 1947 में वह आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। 

अटलजी की कमी सभी को खलेगी-राष्ट्रपति
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वाजपेयी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि सौम्यता की महान मूर्ति अटलजी की कमी सभी को खलेगी। उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उनके निधन को देश के लिये अपूरणीय क्षति बताया। नायडू ने अपने शोक संदेश में कहा ‘‘यह समाचार बेहद दुखद है कि अटल जी नहीं रहे। मैं आज सुबह ही उनकी सेहत की जानकारी लेने के लिये एम्स गया था। मैं सोच भी नहीं सकता हूं कि यह दुखद समाचार इतनी जल्दी मिलेगा।’’ 

भारत ने अपना एक महान सपूत खो दिया
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा, ‘‘आज भारत ने अपना एक महान सपूत खो दिया। वाजपेयी जी को करोड़ों लोग स्नेह और सम्मान देते थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार एवं चाहने वालों के साथ हैं। हम उनकी कमी महसूस करेंगे।’’ पूर्व उपप्रधानमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि 65 वर्षो का साथ छूट गया। अटल जी को केंद्र में पहली स्थिर और गैर कांग्रेसी सरकार के अगुवा के रूप में याद किया जायेगा। मुझे छह साल तक उनके ‘डिप्टी’ के तौर पर काम करने का विशेष अधिकार मिला। वरिष्ठ के रूप में हमेशा मुझे हर संभव तरीके से प्रोत्साहित किया। 

वाजपेयी की सेवाओं को लंबे समय तक याद किया जाएगा-मनमोहन सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर दुख जताते हुए आज कहा कि राष्ट्र के प्रति वाजपेयी की सेवाओं को लंबे समय तक याद किया जाएगा। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वे एक शानदार वक्ता, कवि और देशभक्त थे जिनका निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है। शाह ने कहा कि शुक्रवार शाम चार बजे राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर वाजपेयी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर कल सुबह नौ बजे दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय ले जाया जाएगा। दोपहर एक बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। 

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