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Happy Birthday Sridevi: बॉलीवुड की 'चांदनी' श्रीदेवी की अनसुनी कहानियां

50 साल के अपने फिल्मी करियर में श्रीदेवी ने तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया और फिल्में सिनेमा की दुनिया में नायाब नगीना बन गईं।

Jyoti Jaiswal
Written by: Jyoti Jaiswal 13 Aug 2018, 18:26:55 IST

नई दिल्ली: हसीन अदाओं के रंग से भरी, चुलबुली तबीयत वाली वो रूप की रानी… सिल्वर स्क्रीन पर ऐसी चांदनी बनकर उतरी, जिसके नूर में पूरा जमाना खो गया। बिजली गिराने वाली वो अदाकारा इस तरह दुनिया से रुखसत हो जाएगी, ये किसी ने ख्वाब में भी नहीं सोचा था। हिंदी सिनेमा में श्रीदेवी को जो स्टारडम हासिल हुआ वो अपने आप में इतिहास है। 50 साल के अपने फिल्मी करियर में श्रीदेवी ने तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया और फिल्में सिनेमा की दुनिया में नायाब नगीना बन गईं। श्रीदेवी अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन परदे पर निभाए उनके किरदारों का उनके चाहने वालों के जेहन से जुदा होना नामुमकिन है।

दुबई एक शादी समारोह में शामिल होने गई श्रीदेवी 24 फरवरी 2018 को उस दुनिया में चली गई जहां से कोई लौट कर नहीं आता। ये वीडियो दुबई में हुई उसी शादी का है जहां से लौट कर नहीं आईं श्रीदेवी। इसी शादी में शामिल होने के लिए अपने पति बोनी कपूर और छोटी बेटी खुशी के साथ दुबई पहुंची थी श्रीदेवी। लेकिन शादी के बाद बोनी कपूर और खुशी मुंबई लौट आए थे लेकिन श्रीदेवी एक होटल में वहीं रुक गई थीं बाद में बोनी श्रीदेवी को सरप्राइज देने दुबारा दुबई पहुंचे और उसी रात करीब 8 बजे बाथटब में डूबने से श्रीदेवी की सांसों ने उनका साथ छोड़ दिया थाश्रीदेवी का अचानक यूं जाना उनके चाहने वालों के साथ साथ पूरे परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं था।

श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा का पहली लेडी सुपरस्टार कहा जाता है। इस दुनिया में अब श्रीदेवी की शोहरत की कहानियां ही रहने वाली हैं, उनके वजूद की अब सिर्फ निशानियां ही रहने वाली हैं...। श्रीदेवी ने हर वो चीज हासिल की, जिसके बारे में उन्होंने सोचा था फिर चाहें वो शोहरत हो, पैसा हो जान से ज्यादा प्यार करने वाला पति हो या जान से प्यारी बेटियां। श्रीदेवी की बड़ी बेटी जाहन्वी तो अपनी पहली ही फिल्म से सुपरहिट हो गई हैं। श्रीदेवी अगर आज होती तो बेशक कैमरे में कैद अपने दिल की धड़कन जाह्नवी को देख कर वो खुशी के सातवें आसमान पर होती। चांदनी को इन लम्हों का इंतजार बरसों से था।

श्रीदेवी की एक जिद ने परदे पर हीरोइन की शक्ल-सूरत और नाजो अंदाज बदल दिया। इसकी शुरुआत 1986 में नगीना जैसी फिल्म से हो चुकी थी। मिस थंडर थाइज के चुभते जुमलों से पीछा छुड़ाने के लिए श्रीदेवी ने अपने रूप को निखारना शुरु किया। इसके लिए जरूरत पड़ी तो नगीना जैसी फिल्म में कॉन्ट्रैक्ट लेंस भी पहनना कुबूल कर लिया। हिंदी सिनेमा में कॉन्टेक्ट लेंस पहने वाली श्रीदेवी पहली हीरोइन बनी। इसी तरह 1987 में आई मिस्टर इंडिया जैसी फिल्म में झीनी सिफॉन साड़ी पहनकर अपने हुस्न के साथ बिंदास डांस का भी जलवा बिखेरा।

90 के दशक तक श्रीदेवी की खूबसूरती और कातिल अदाओं के चर्चे हॉलीवुड तक में होने लगे थे। श्रीदेवी के लाजवाब ग्लैमर की बदौलत मिस्टर इंडिया जैसी साइंस फिक्शन फिल्म विदेशों में खासी पॉपुलर हुई थी। ये बात उस दौर के कई ट्रेड मैगजीन्स में सुर्खियों के साथ छपती थी। इन्हीं सुर्खियों में एक सुर्खियां थी स्टीवन स्पीलबर्ग जैसे फिल्ममेकर की। स्पीलबर्ग अपनी महात्वाकांक्षी फिल्म जुरासिक पार्क की हीरोइन श्रीदेवी को बनाना चाहते थे। लेकिन श्रीदेवी को तब ये ऑफर कुछ खास नहीं लगा। श्रीदेवी ने स्पीलबर्ग को ना कह सबको चौंका दिया था।

1990 के आस-पास फिल्म इंडस्ट्री में आलम ये था, कि हर बड़ा प्रोड्यूसर डायरेक्टर अपनी अगली फिल्म की कल्पना श्रीदेवी को लेकर करता था। श्रीदेवी की मर्जी होती वो कोई फिल्म चुने या ना कह दें। श्रीदेवी को लेकर लोगों की दीवानगी ऐसी थी कि बाजीगर फिल्म के निर्माता तो डर ही गए। फिल्म के निर्माता गणेश जैन काजोल और शिल्पा शेट्टी से पहले श्रीदेवी को डबल रोल के लिए साइन कर लिया था, लेकिन बाद में श्रीदेवी को फिल्म से हटा दिया गया। दरअसल, कहानी में हीरो शाहरुख खान के हाथों हेरोइन का मर्डर होता है। निर्माता गणेश जैन इस बात से डर गए कि लोग फिल्म में श्रीदेवी का मर्डर देखना पसंद नहीं करेंगे।

स्टारडम श्रीदेवी के लिए कोई नई बात नहीं थी। श्रदेवी की जिंदगी में शोहरत की बुलंदी तो उस उम्र से दस्तक दे रही थी, जब उन्हें इसका इल्म तक नहीं था। आज की पीढ़ी ये जानकर हैरान रह जाएंगी कि श्रीदेवी को देखकर फिल्मों के रोल तभी से लिखे जाने लगे थे, जब उनकी उम्र 10 साल की भी नहीं थी। श्रीदेवी तब तमिल फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट थी। श्रीदेवी को पहली फिल्म कंडन करुनाई की शूटिंग के लिए उनके माता-पिता गोद में लेकर गए थे। वो श्रीदेवी 10 साल की होते होते सुपरस्टार बन गई। इतनी बड़ी स्टार की पहली क्लास के बाद स्कूल जाने तक की मोहलत नहीं थी।

13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवकाशी में पैदा हुईं श्रीदेवी के पिता वकील थे। फिल्मी दुनिया से इस परिवार का नाता दूर-दूर तक नहीं था, लेकिन एक घटना ने श्रीदेवी का फिल्मों में आना जैसे पक्का कर दिया। तब 4 साल की थी श्रीदेवी, अपने पिता के साथ श्रीदेवी एक राजनीतिक सभा में गईं थी। उस सभा में जाना था श्रीदेवी के चाचा, जो राजनीति में सक्रिय थे, लेकिन अचानक कहीं बिजी हो जाने की वजह से उन्होंने बड़े भाई अयप्पन को वहां जाने के लिए कह दिया, तब श्रीदेवी ने भी पिता के साथ जाने की जिद की। इसी सभा में 4 साल की श्रीदेवी को कन्नड़ के मशहूर कवि कवियारासर ने देखा और उनके पिता से श्रीदेवी को फिल्मों में भेजने की बात कही।

12 साल की होते होते श्रीदेवी हीरोइन बन गईं। 1976 में आई वो फिल्म थी मूंड्रु मुडिचू। डायरेक्टर के बालाचंद्रन की इस फिल्म में श्रीदेवी के हीरो थे रजनीकांत और कमल हसन जैसे एक्टर। फिल्म में श्रीदेवी का रोल रोमांटिक था, लेकिन ऐसे सीन में चेहरे पर सटीक भाव उतरना श्रीदेवी को आता ही नहीं। 12 साल की बच्ची को आखिर रोमांटिक एक्सप्रेशन का आइडिया भी कहां से आता, लेकिन इस उम्र में खूबसूरती ऐसी थी कि साउथ का हर प्रोड्यूसर उन्हें अपनी फिल्म में बतौर हीरोइन लेने को बेताब होता। तब के बाला चंद्रन ने श्रीदेवी के माता-पिता को सलाह दी कि इसे कुछ अच्छी रोमांटिक फिल्में दिखाओ।

1977 में आई तमिल फिल्म 16 वायाथिनिले के बाद श्रीदेवी तमिल फिल्मों की सुपरस्टार बन गईं। रजनीकांत और कमल हसन के साथ लव ट्रायंगल की कहानी बॉक्स ऑफिस पर 10 लाख रुपये की कमाई कर गई। इसके साथ साउथ में श्रीदेवी को साइन करने की होड़ लग गई। श्रीदेवी की तमिल फिल्म कन्नड़ और तेलगू में रीमेक की जाने लगी. इसी कामायबी ने खोला श्रीदेवी के लिए बॉलीवुड का दरवाजा।

हालांकि श्रीदेवी 1975 में आई हिंदी फिल्म जूली में काम कर चुकी थीं, लेकिन 1979 में आई जिस फिल्म सोलवां सावन से श्रीदेवी हिंदी फिल्मों की हीरोइन बनी, वो उसी सुपरहिट तमिल फिल्म 16 वायाथिनिले की रीमेक थी।

श्रीदेवी की पहली हिंदी फिल्म सोलवा सावन बुरी तरह फ्लॉप रही. लेकिन बॉलीवुड में श्रीदेवी की सहज अदायगी और बेमिसाल खूबसूरती जरूर नोटिस की गई। ऐसे में श्रीदेवी को मिला साउथ के डाइरेक्टर के राघवेन्द्र राव की फिल्म हिम्मतवाला का ऑफर। फिल्म के हीरो जीतेन्द्र जैसे बड़े स्टार थे। श्रीदेवी ने बिना कुछ सोचे ही हां कर दी। हिम्मतवाला की कामयाबी के साथ श्रीदेवी रातों रात हिंदी फिल्मों की स्टार एक्ट्रेस बन गई। हिम्मतवाला क्या हिट हुई, श्रीदेवी के सामने जीतेन्द्र के साथ लीड फिल्मों का अंबार लग गया।

80 के दशक में श्रीदेवी का जादू हिंदी फिल्मों में चल तो गया. लेकिन बला की खूबसूरत इस हेरोइन को तमगा मिला सिर्फ एक बेहतर डांसर का। ऐसे गानों से श्रीदेवी को स्टारडम तो मिल गया, लेकिन दिली चाहत थी बतौर एक्ट्रेस अपनी पहचान पुख्ता करने की। वो चाहत 1983 में आई फिल्म सदमा से पूरी हुई। ये फिल्म भी श्रीदेवी की तमिल फिल्म मुन्द्रम पिराई की रीमेक थी।

हिंदी फिल्मों में बतौर हीरोइन श्रीदेवी को पहला दमदार रोल देने वाले बंबई के डाइरेक्टर थे हर्मेश मलहोत्रा। फिल्म थी नगीना, जो इच्छाधारी नागिन की दंतकथा पर अधारित थी। अंधविश्वास पर आधारित इस फिल्म को लेकर श्रीदेवी उत्साहित नहीं थी, लेकिन कहानी में उनका किरदार बड़े पैमाने पर गढ़ा गया था। यूं कहें कि फिल्म के हीरो ऋषि कपूर जैसे स्टार से भी बेहतर। ऐसी दलीलों के साथ हर्मेश मलहोत्रा ने आखिर श्रीदेवी राजी ही कर लिया। नगीना की शूटिंग अभी चल ही रही थी, तब तक मुंबई का एक और प्रोड्यूसर श्रीदेवी का मुरीद हो गया। वो कोई और नहीं, बल्कि श्रीदेवी के पति बोनी कपूर थे।

बोनी कपूर मिस्टर इंडिया की स्क्रिप्ट लेकर श्रीदेवी के पास गए थे। ये बात 1984 के आखिरी महीनों की है। श्रीदेवी को फिल्म की कहानी तो पसंद आई। लेकिन खामोशी से घूरती उस नौजवान प्रोड्यूसर की निगाहों को नहीं समझ पाईं श्रीदेवी। बोनी कपूर श्रीदेवी को देखते ही दिल दे बैठे। ये बात बोनी कपूर ने श्रीदेवी को बरसों बाद बताई, जब दोनों के बीच दोस्ती का सिलसिला शुरु हुआ। तब बोनी कपूर के खामोश रहने की एक वजह भी थी। 1984 में ही वो मोना शौरी कपूर से शादी कर चुके थे। श्रीदेवी ने मिस्टर इंडिया तो साइन कर ली, लेकिन बोनी कपूर के दिल की बात दिल में ही रह गई।

लम्हे की शूटिंग के दौरान श्रीदेवी के पिता का निधन हुआ। वो दौर श्रीदेवी को मानसिक तौर पर तोड़ देने वाला था, लेकिन उस दौर में बोनी कपूर एक सच्चे दोस्त की तरह साथ रहे। रूप की रानी चोरों का राजा की शूटिंग के दौरान जिस तरह उन्होंने श्रीदेवी का ख्याल रखा, उन्हें लेकर श्रीदेवी के खयालात बदलते चले गए। इसी बीच श्रीदेवी की मां बुरी तरह बीमार पड़ गईं। डॉक्टरों ने उन्हें अमेरिका ले जाने की सलाह दी। बोनी कपूर ने न सिर्फ श्रीदेवी को शूटिंग से सिर्फ मोहलत दी, बल्कि अमेरिका में इलाज के दौरान खुद भी तीन महीने तक साथ रहे। आगे चल कर 2 जून 1996 श्रीदेवी ने बोनी कपूर संग शादी के सात फेरे ले लिए।

वो साल था 2012 जब श्रीदेवी ने फिल्मी परदे पर अपना कमबैक किया था। पूरे 16 साल बाद फिल्म इंग्लिश-विंग्लिश के साथ श्रीदेवी एक बार फिर सिल्वर स्क्रीन पर थीं। इस फिल्म में बॉलीवुड की मिस हवाहवाई, परदे पर इंग्लिश सिखती नज़र आई। एक बार फिर वही पुरानी श्रीदेवी दर्शकों के सामने थी, जिसकी अदाकारी को देख लोग अक्सर हैरान हो जाया करते थे।

साल 2017 में आई फिल्म मॉम श्रीदेवी की आखिरी फिल्म साबित हुई। फिल्म में श्रीदेवी ने मां का ऐसा दमदार किरदार निभाया कि बड़े से बड़े एक्टर और एक्ट्रसेस को उनके अभिनय का फिर से लोहा मानना पड़ा..। मॉम के रिलीज के वक्त श्रीदेवी ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 50 साल पूरे किए थे। अगर फिल्मों की तादाद की बात करें तो ये उनकी 300 वीं फिल्म थी। मॉम के किरदार के लिए श्रीदेवी को उनके जाने के बाद बेस्ट एक्ट्रेस के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया।

उस अवॉर्ड समारोह में श्रीदेवी के पति बोनी कपूर दोनों बेटियों जाहन्वी और खुशी के साथ शामिल हुई हैं। अपनी मां की याद में जाह्नवी ने उस दिन श्रीदेवी की साड़ी पहन कर अवॉर्ड समारोह में गई थीं।

श्रीदेवी की दूसरी पारी भी काफी कामयाब रही। उनके दीवानों को तो इंतजार अगली फिल्म का था, लेकिन अचानक आई उनकी मौत की खबर ने सबको सदमे में डाल दिया। ये श्रीदेवी की असरदार अदाकारी का ही कमाल है जो दुनिया के सबसे बड़े अवॉर्ड समारोह ऑस्कर में उनकों श्रद्धांजलि दी गई, न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में भी उनकी फिल्म को दिखा कर याद किया गया...वहीं कान फिल्म फेस्टिवल में भी श्रीदेवी को श्रद्धांजलि दे गई।

अपने आखिरी दिनों में श्रीदेवी बड़ी बेटी जाह्नवी को धड़क फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कराने की तैयारियों में लगी थीं। धड़क की शूटिंग की वजह से ही जाह्नवी दुबई उस शादी में नहीं पहुंच पाई थी जहां श्रीदेवी को आखिरी बार मुस्कुराते हुए देखा गया। खुशियां मनाते हुए देखा गया।  शादी के बाद बोनी अपनी बेटी खुशी को साथ लेकर मुंबई लौट आए वहीं श्रीदेवी ने वहां रूकने का फैसला किया। और जब बोनी दुबारा दुबई पहुंचे तो जैसे श्रीदेवी अपने आखिरी वक्त में उनके आने का ही इंतजार कर रही थीं।

बोनी और श्रीदेवी में करार तो रोमांटिक डिनर पर जाने का हुआ था .लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था । अपने कमरे के बाथ रूम में तो श्रीदेवी चल कर गईं थी लेकिन बाहर लौटी उनकी मौत की खबर। अपने चाहने वालों को तनहा छोड़ श्रीदेवी अपने आखिरी सफर पर निकल पड़ी । श्रीदेवी के चाहने वालों के पास अब सिर्फ उनकी यादें हैं .श्रीदेवी की बाते हैं और 300 फिल्मों में निभाए उनके किरदारों का कारवां है।

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